राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मौलाना नूर आलम अमीनी नहीं रहे

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मौलाना नूर आलम अमीनी नहीं रहे
  • दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद और अरबी के बड़े विद्वान थे मौलाना -नूर आलम

देवबंद [24CN] : इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद व अरबी कर बड़े विद्वान मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो गया। वे ७० वर्ष के थे। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में मौलाना अमीनी के हजारों शागिर्दों हैं।
मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी मौलाना नूर आलम खलील अमीनी दारुल उलूम में वरिष्ठ उस्ताद होने के साथ साथ अरबी के बड़े विद्वानों में शामिल थे। वे पिछले काफी दिनों से बीमार थे। मेरठ के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। रविवार की देर रात्रि उनकी तबीयत बिगड़ गई, उन्हें चिकित्सक के यहां ले जाया जाता उससे पहले ही उनकी मौत हो गई।

मौलाना अमीनी के इंतकाल की खबर से इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देखते ही देखते लोगों की भीड़ अफ्रीकी मंजिल स्थित उनके आवास पर जमा हो गई। १८ दिसंबर १९५२ को बिहार में जन्मे मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का दुनिया के इस्लामिक जगत में बड़ा नाम था। उनके दुनिया भर में हजारों शागिर्द हैं। दारुल उलूम में अरबी साहित्य के शिक्षक मौलाना अमीनी की पुस्तक मुफ्ता अल-अरबिया विभिन्न मदरसों में दर्स निजामी के पाठ्यक्रम में शामिल है।

अरबी भाषा में सराहनीय सेवाओं के लिए मौलाना नूर आलम खलील अमीनी को वर्ष २०१८ में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विशेष सम्मान से नवाजा था। उनके इंतकाल पर दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, नायाब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी, महासचिव मौलाना महमूद मदनी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी,  मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी, मौलाना शकेब कासमी ने गहरा दुख जताया है।


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