एपीआई सहारनपुर की मासिक वैज्ञानिक गोष्ठी में अस्थमा उपचार में बायोलॉजिक्स की भूमिका पर चर्चा
सहारनपुर। एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) के तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और अस्थमा उपचार के नवीन विकल्पों की विस्तार से जानकारी दी। जीपीओ रोड स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित एपीआई ब्रांच की मासिक वैज्ञानिक गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए एलकैमिस्ट हॉस्पिटल, पंचकूला से आए मुख्य वक्ता डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के विकास के साथ अब फेफड़ों की गंभीर से गंभीर बीमारियों की जांच और उपचार अधिक सटीक एवं प्रभावी ढंग से संभव हो गया है।
उन्होंने बताया कि ईबीयूएस तकनीक के माध्यम से फेफड़ों का अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है, जिससे रोगों की पहचान और उपचार में काफी सहायता मिलती है। डॉ. करन सिंगला ने अस्थमा के उपचार में बायोलॉजिक्स दवाओं की उपयोगिता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ये दवाएं गंभीर अस्थमा के मरीजों के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो रही हैं। एपीआई के अध्यक्ष डॉ. कलीम अहमद ने कहा कि बायोलॉजिक्स दवाएं शुरू करने से पहले मरीज की उचित जांच और सही मूल्यांकन आवश्यक है। बिना सही जांच के इन दवाओं का प्रयोग मरीज को लाभ के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है।
कार्यक्रम में एपीआई के सचिव डॉ. विकास अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि वैज्ञानिक सचिव डॉ. सौम्या जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर डॉ. अनुपम मलिक, डॉ. जयपाल चंद, डॉ. मोहन पाण्डेय, डॉ. नरेश नौसरान, डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. अतुल जैन, डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. अनिल मलिक, डॉ. सुधीर अग्रवाल, डॉ. सत्यानंद साथी, डॉ. आर.एस. पंवार, डॉ. संजीव वर्मा, डॉ. सी.एस. चोपड़ा, डॉ. जावेद अख्तर, डॉ. सुशान्त शर्मा सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।
