कोरोना से मौतों पर भारत ऐसे लगा रहा ब्रेक, ये आंकड़े जगा रहे उम्‍मीद

 
  • भारत में अब रोज आ रहे कोरोना के 5000 से ज्‍यादा मामले, मौतों की संख्‍या में बढ़त नहीं
  • कोरोना मरीजों की जिंदगियां बचाने में सफल हो रहा भारत, कई देशों से बेहतर हैं हालात
  • टेस्‍ट के मुकाबले मौतों की संख्‍या के मामले में सिर्फ रूस से पीछे, हर 755 टेस्‍ट पर एक मौत
  • भारत में अबतक एक दिन में 200 मौतें नहीं, 4 मई को गई थीं 175 लोगों की जान

नई दिल्‍ली
भारत में कोविड-19 के मामलों की संख्‍या अब ज्‍यादा तेजी से बढ़ रही है। पिछले हफ्ते जहां औसतन 3800 मामले रोज आ रहे थे, इस हफ्ते यह आंकड़ा बढ़कर 5500+ हो गया है। शनिवार सुबह केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 6,654 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 137 लोगों की मौत हुई है। भारत में कुल मामलों की संख्‍या सवा लाख से ज्‍यादा हो गई है। इसके मुकाबले मरने वालों की संख्‍या 3,720 है। भारत ने कोरोना से होने वाली मौतों पर लगाम कसी है। देश में कोविड-19 से मृत्‍यु-दर 3% के आसपास है। वह दुनिया में सबसे कम मार्टलिटी रेट वाले चार देशों में शामिल हैं।

बाकी देशों के मुकाबले भारत के हालात बेहतर
दुनिया के कई देश कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित हैं। केसेज के मुकाबले मौतों का अनुपात देखें तो भारत और जर्मनी लगभग एक पोजिशन पर हैं। शुक्रवार तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति 39.18 केसेज पर एक मौत हो रही है। जर्मनी में यह आंकड़ा 37.27 है। जर्मनी वह देश है जिसके कोविड-19 कंटेनमेंट मॉडल ने खूब तारीफें बटोरी। रूस इस मामले में सबसे बेहतर पोजिशन पर है जहां हर 115 केस पर एक मौत हो रही है। इटली, स्‍पेन, यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में 10 केसेज से भी कम पर एक मौत हुई है।

भारत का मार्टलिटी रेट लगातार सुधर रहा
भारत में कोरोना वायरस के चलते अबतक 3,720 लोगों की मौत हुई है। एक लाख केसेज से ज्‍यादा वाले देशों के आंकड़े देखें तो भारत का मार्टलिटी रेट कहीं बेहतर है। भारत का कोविड-19 मार्टलिटी रेट 2.9% है जो रूस, तुर्की और पेरू से ही कम है। ब्राजील, अमेरिका का मार्टलिटी का रेट 5% से ज्‍यादा है। स्‍पेन का करीब 10 पर्सेंट, इटली 14.24%, यूके 14.36% और फ्रांस का मार्टलिटी रेट 15.52% है।

मुंबई में ही देश के 20% से ज्यादा केस

  • मुंबई में ही देश के 20% से ज्यादा केस

    कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र में कुल केस 44,582 हो चुके हैं। इनमें से 27,251 तो सिर्फ मुंबई के हैं यानी सूबे के 61 प्रतिशत से ज्यादा केस। इतना ही नहीं, देश में कोरोना के कुल मामलों में से 21.8 प्रतिशत अकेले मुंबई से हैं। इसका मतलब है कि देश का हर पांचवां संक्रमित इसी शहर से है। मुंबई में अब तक 5,769 मरीज ठीक हो चुके हैं जबकि 909 की मौत हो चुकी है।
  • दिल्ली में 12 हजार से ज्यादा केस

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी कोरोना से कराह रही है। यहां कुल मामले 12,319 हो चुके हैं। यानी देश के कुल मामलों में करीब 10 प्रतिशत सिर्फ दिल्ली से हैं। यहां 5,897 मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं जबकि 208 मरीजों की मौत हो चुकी है।
  • चेन्नै का भी बुरा हाल

    महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु देश का दूसरा सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित राज्य है। यहां कुल केस 14,753 हैं। इनमें से ज्यादातर राजधानी चेन्नै के हैं जहां अब तक 9,370 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 5,527 ऐक्टिव हैं जबकि 3,773 इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। चेन्नै में कोरोना अब तक 70 लोगों की जान भी ले चुका है।
  • अहमदाबाद में भी 10 हजार के करीब केस

    कोरोना से तीसरे सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य गुजरात में ज्यादातर मामले अहमदाबाद से हैं। गुजरात में कुल मामले 13,268 हैं। इनमें से 9,724 तो सिर्फ अहमदाबाद से हैं। शहर में अब तक 3,658 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं जबकि मरने वालों की संख्या 645 हो चुकी है। अहमदाबाद में ऐक्टिव केस की संख्या 5,421 है।
  • ठाणे में भी कोरोना का कहर ज्यादा

    महाराष्ट्र में मुंबई का तो बुरा हाल है ही, ठाणे और पुणे पर भी कोरोना का कहर टूट रहा है। ठाणे में अब तक 5,717 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 84 की मौत हो चुकी है। 1,172 मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं जबकि 4,461 का अब भी इलाज चल रहा है।

टेस्‍ट के मुकाबले डेथ रेट भी कम
भारत अब रोज करीब एक लाख टेस्‍ट्स कर रहा है। टेस्‍ट के मुकाबले मौतों का अनुपात देखें तो भी भारत का नंबर सिर्फ रूस के बाद आता है। भारत में हर 755 टेस्‍ट पर एक मौत हो रही है। ब्राजीज जैसे देश में हर 37 टेस्‍ट के बाद एक पेशेंट की मौत हो जा रही है। फ्रांस में यह आंकड़ा 49 टेस्‍ट, यूके में 86, इटली में 100 और अमेरिका में 140 है।

भारत में मौतों की संख्‍या कम क्‍यों?
भारत में मार्टलिटी रेट कम होने की कई वजहें हो सकती हैं। लॉकडाउन सबसे अहम है। शुक्रवार को सरकार ने जो डेटा जारी किया, उसके मुताबिक लॉकडाउन 1 और 2 की वजह से 14 लाख से 29 लाख केसेज और 54,000 मौतों को रोका जा सका। बॉस्‍टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक स्‍टडी भी बताती है कि लॉकडाउन की वजह से सीधे-सीधे 1.2 लाख से 2.1 लाख जिंदगियां बचाई जा सकीं। भारत में युवा और ग्रामीण आबादी बहुतायत में है, इसके अलावा टीबी के लिए BCG टीकाकरण, वायरस के थोड़े हल्‍के स्‍ट्रेन का फैलना भी मौतों की कम संख्‍या के पीछे वजह हो सकते हैं।

 
 

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