SIR पर ओवैसी का केंद्र पर निशाना, बोले- मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया से बढ़ेगी लोकतांत्रिक चिंता
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के सत्यापन के नाम पर बड़े पैमाने पर लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट में ओवैसी ने दावा किया कि दस्तावेज आधारित सत्यापन प्रक्रिया के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से लाखों नाम हटाए गए हैं। उनका आरोप है कि अब सरकार इस पूरी प्रक्रिया को एक स्थायी ढांचे का रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
‘स्थायी व्यवस्था बनाने की तैयारी’
ओवैसी ने कहा कि सरकार एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जिसके माध्यम से हटाए गए नामों की समीक्षा की जाए और कथित अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत तथा निर्वासन की प्रक्रिया को संस्थागत रूप दिया जा सके। उन्होंने आशंका जताई कि इससे बड़ी संख्या में नागरिकों को प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर की आशंका
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र में आम नागरिक की सबसे बड़ी ताकत है। यदि लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाते हैं, तो इससे विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्गों की राजनीतिक भागीदारी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का असर समाज के कमजोर तबकों पर अधिक पड़ सकता है।
नागरिकता और मतदाता सूची को लेकर कही अहम बात
ओवैसी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हट जाना स्वतः उसकी नागरिकता समाप्त होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं और प्रभावित लोगों के पास अपने नाम पुनः जुड़वाने के कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं।
चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
ओवैसी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे मामलों से जुड़े विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितने लोगों के नाम किन कारणों से हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
कमजोर वर्गों पर प्रभाव का दावा
ओवैसी का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया का सबसे अधिक असर मुसलमानों, महिलाओं, प्रवासी श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
हालांकि, केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की ओर से समय-समय पर यह कहा जाता रहा है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए किया जाता है तथा सभी कार्रवाई निर्धारित नियमों के तहत की जाती है।
