वंदे मातरम पर सियासत गरम, थरूर के बयान पर बीजेपी का पलटवार
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन को लेकर केरल में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन इसके गायन को लेकर अनावश्यक नियम नहीं थोपे जाने चाहिए।
थरूर ने उठाए अनिवार्यता पर सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि वंदे मातरम देश का राष्ट्रगीत है और इसका सम्मान सभी नागरिक करते हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से किसी कार्यक्रम की शुरुआत में इसका एक हिस्सा गाया जाता है, जबकि राष्ट्रगान का स्थान अलग होता है।
थरूर के अनुसार, हर सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगीत के सभी अंतरे गाना अनिवार्य करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने इसे “गैर-जरूरी” और “थोपा गया नियम” बताते हुए कहा कि अधिकांश लोगों को गीत के शुरुआती एक या दो अंतरे ही याद होते हैं।
बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा
थरूर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कुछ राजनीतिक दलों और दबाव समूहों को खुश करने के लिए राष्ट्रगीत जैसे मुद्दों पर विवाद खड़ा कर रही है।
पूनावाला ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध या उसके गायन पर आपत्ति जताना देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावनाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम लीग के दबाव में राजनीति करने का भी आरोप लगाया।
क्या है विवाद की वजह?
विवाद की शुरुआत केरल विधानसभा में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ी बताई जा रही है, जहां वंदे मातरम का पूरा संस्करण नहीं गाया गया था। इस पर राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर ने नाराजगी जताई थी।
इसके बाद राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वंदे मातरम के सभी अंतरों के गायन को लेकर कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है। सरकार का तर्क था कि संसद ने इस संबंध में कोई बाध्यकारी कानून नहीं बनाया है, बल्कि केवल दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
राजनीतिक बहस जारी
वंदे मातरम को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक प्रतीकों और संवैधानिक प्रावधानों पर राजनीतिक बहस को हवा दे दी है। जहां बीजेपी इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा विषय बता रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रगीत के सम्मान और उसके अनिवार्य गायन को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
