नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र इस बार लगातार सियासी घमासान की भेंट चढ़ता आ रहा है। दूसरा सच यह भी है कि अभी ये घमासान दूर-दूर तक थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है और यह गतिरोध और बढ़ने के पूरे आसार हैं।

इसकी वजह है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी आक्रामक रणनीति का संकेत देते हुए लोकसभा और राज्यसभा के अपने सभी सांसदों के लिए एक कड़ा व्हिप जारी किया है। पार्टी ने अपने सभी सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को दोनों सदनों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, जिससे बड़े राजनीतिक घमासान के संकेत मिल रहे हैं।

सरकार की रणनीति पर कांग्रेस का रुख

बता दें कि कांग्रेस का ये तीन दिनों का व्हिप ऐसे समय में सामने आया है, जब सरकार संसद में बेहद संवेदनशील और विवादित एफसीआरए (FCRA-विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) संशोधन बिल को चर्चा के लिए लाने की तैयारी कर रही है।

समझिए क्या है कांग्रेस के व्हिप में?

बात अगर कांग्रेस के व्हिप की करें तो राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश की तरफ से जारी निर्देश में कहा गया है कि सोमवार, मंगलवार और बुधवार यानी 10, 11 और 12 अगस्त को राज्यसभा में बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।

जारी व्हिप में सख्त लहजे में बताया गया है कि कांग्रेस पार्टी के सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वे बिना चूके सुबह 11:00 बजे से सदन की कार्यवाही स्थगित होने तक अपनी-संसदीय सीटों पर मौजूद रहें और पार्टी के रुख का समर्थन करें। इसे सबसे महत्वपूर्ण माना जाए। ठीक इसी तरह का एक समान व्हिप लोकसभा के कांग्रेस सदस्यों के लिए भी जारी किया गया है।

विपक्षी दलों को भी किया गया सतर्क

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस ने केवल अपने ही नहीं, बल्कि ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य सभी सहयोगी दलों से भी यह अपील की है कि वे इन तीन दिनों के दौरान अपने सांसदों की सदन में पूरी उपस्थिति सुनिश्चित करें, ताकि सरकार का मुकाबला मजबूती से किया जा सके।

इन बड़े बिल पर है नजरें

गौरतलब है कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार इस दौरान बड़े कदम उठा सकती है। इसमें एफसीआरए संशोधन बिल, जिसको लेकर सदन में तीखी बहस होने के पूरे आसार हैं। दूसरी ओर परिसीमन पर संविधान संशोधन बिल। माना जा रहा है कि सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को भी फिर से लाने पर विचार कर रही है।

हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि संसदीय कार्य राज्य मंत्री द्वारा अगले सप्ताह के लिए जारी किए गए संभावित सरकारी कामकाज की सूची में आधिकारिक तौर पर इन दोनों में से किसी भी बिल का जिक्र नहीं है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और ज्यादा बढ़ गई है।