गुजरात के कानून मंत्री चूडास्मा का चुनाव रद्द करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट

 

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने कदाचार के आधार पर गुजरात के कानून मंत्री भूपेन्द्र सिंह चूडास्मा का 2017 में विधान सभा के लिए निर्वाचन रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले पर शुक्रवार को रोक लगा दी। जस्टिस एम एम शांतानागौडार और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने चूडास्मा की अपील पर वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के 12 मई के आदेश पर रोक लगाई। इसके साथ ही पीठ ने चूडास्मा के प्रतिद्वन्दी कांग्रेस के अश्विन राठौड़ तथा अन्य को इस अपील पर नोटिस जारी किये। भूपेन्द्र सिंह चूडास्मा 2017 के विधान सभा चुनाव में ढोलकिया सीट से 327 सीटों से विजयी घोषित किए गए थे। वह इस समय गुजरात की विजय रूपाणी सरकार में कानून मंत्री हैं।

इस मामले की सुनवाई के दौरान चूडास्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कहा कि उनके मुवक्किल का निर्वाचन उच्च न्यायालय ने भ्रष्ट आचरण के आधार पर निरस्त कर दिया है क्योंकि डाक से मिले 429 मतों की गणना नहीं की गयी थी जो भाजपा नेता की जीत के अंतर से ज्यादा थे। चूडास्मा की ओर से बहस में हिस्सा लेते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि उनके प्रतिद्वन्दी ने इस अनुमान के आधार पर चुनाव याचिका दायर की कि निर्वाचन अधिकारी ने 429 मतों की गणना नहीं की। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट को इन 429 मतों को मंगाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि क्या इन मतों को सही तरीके से अस्वीकार किया गया है या नहीं।

साल्वे ने कहा कि चूडास्मा और रिटर्निंग अधिकारी के बीच कोई संबंध नहीं था और न ही इस तरह के लाभ के लिये किसी सांठगांठ के तथ्य की पुष्टि ही हुई। राठौड़ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सारे तथ्य पेश नहीं किये गये और ईवीएम के मतों के अंतिम दौर की गणना होने तक डाक मतों लाया ही नहीं गया था। सिब्बल ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी ने फार्म 20 पर हस्ताक्षर किए जिसके अनुसार 429 मतों को अस्वीकार किया गया जबकि रिटर्निंग अधिकारी ने चुनाव पर्यवेक्षक से कहा कि कोई भी मत अस्वीकार नहीं किया गया।

पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के साथ ही नोटिस जारी कर रही है। सिब्बल ने इसका विरोध किया तो पीठ ने कहा कि हमेशा यही प्रक्रिया अपनाई गयी है और ऐसे अनेक मामलों में यह हुआ है। हाईकोर्ट ने अश्विन राठौड़ की याचिका पर 12 मई को चूडास्मा का निर्वाचन कदाचार के आधार पर रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि निर्वाचन आयोग ने मतगणना के दौरान डाक से मिले 429 मतों को गलत तरीके से अस्वीकार किया था।

 
 

Related posts

Top