श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान के विभिन्न अवतारो का वर्णन किया
नकुड 3 जून इंद्रेश। कथा वाचक आचार्य भगवतीप्रसाद शुक्ल ने कहा कि जगत मे जब भी आसुरी शक्तियों के उत्पात बढते है तथा संतो का जीवन दुभर होता है तब भगवान अपने भक्तो की रक्षा के लिये अवतार लेते है। ओर आसुरी शक्तियो का विनाश करते है।
नगर मे शिवाला महादेव मंदिर मे श्री राधे गोविंद सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद भगवत कथा के तीसरे दिन श्रोताओं को संबोधित करते हुए आचार्य भगवतीप्रसाद ने कहा कि ईश्वर के अतंत अवतार हुए है। उनमे मुख्य 24 अवतार है। भगवान के अवतार लेने के कई कारण होते है। वे दुष्टो के संहार व भक्तों के उद्धार के लिये अनेक रूप मे प्रकट होते है। इसलिय भगवान का भजन करते रहना ही भक्त का कर्तव्य है।
कथा मे उन्होंने माता सती की कथा का वर्णन किया। कहा कि सती ने अपने जीवन मे कई बार गलती की। उनका श्रीराम की परीक्षा लेना , भगवान शिव के पूछने पर परीक्षा लेने की बात को मनाकरना व भगवान शिव के बार बार मना करने पर भी पिता के यज्ञ मे भाग लेना ये उनके जीवन की बडी भूल रही। इसी कारण उन्हे दक्ष के यज्ञ मे अपने आपको स्वाह करना पडा। दक्ष वह है जो चतुर हो।
इससे पूर्व नीरज गोयल सर्राफ ने विधिवत पूजा अर्चना की। साथ ही इस मौके पर संजीव चैधरी, संजीव जैन सर्राफ, धर्मेद्र राणा, मनोज चैहान, अरविंद सिंघल, सदंीप पुंडीर, रमेश सैनी ,राजन शर्मा, पंकज जैन, मामचंद गोयल, सहित सैंकडो श्रद्धालु उपस्थित रहे।
