कोरोना मामले की जांच की मांग करने वाले देशों के सामने झुका डब्‍ल्‍यूएचओ

 

जिनेवा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कोरोना वायरस के संबंध में स्वतंत्र मूल्यांकन शुरू करने के अपने अधिकतर सदस्य देशों के आह्वान के सामने सोमवार को झुक गया। महामारी को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव है जो अब तक तीन लाख से अधिक लोगों की जान ले चुकी है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर चुकी है।

अफ्रीकी और यूरोपीय देशों तथा अन्य देशों के संगठन ने कोरोना महामारी को लेकर एक ‘समग्र मूल्यांकन’ की मांग की है। इस बारे में कहा गया है कि यह कोविड-19 पर वैश्विक प्रतिक्रिया के डब्ल्यूएचओ के समन्वय से ‘मिले सबक’ की समीक्षा पर आधारित है।

अमेरिका का दावा- चीन की लैब में पैदा हुआ कोरोना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि नया कोरोना वायरस चीन की एक प्रयोगशाला से पैदा हुआ, जबकि वैज्ञानिक समुदाय ने इस बात पर जोर दिया है कि मुमकिन है वायरस किसी जानवर के जरिए इंसानों में पहुंचा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सभा का उद्घाटन किया और उल्लेख किया कि कई देशों ने डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों की अनदेखी की। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘अलग-अलग देशों ने अलग-अलग, कई बार विरोधाभासी रणनीतियां अपनाईं और हम सब एक भारी कीमत चुका रहे हैं।’

डब्‍लयूएचओ ने कहा, शुरू होगी स्‍वतंत्र जांच
सोमवार को शुरू हुए इस सत्र में विभिन्न देशों के सरकार प्रमुख, राष्ट्र प्रमुख और स्वास्थ्य मंत्री शामिल हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी को लेकर सामने आई संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी की प्रतिक्रिया के मद्देनजर वह एक स्वतंत्र आकलन शुरू करेंगे।

डब्‍ल्‍यूएचओ की भूमिका पर भी सवाल
डब्ल्यूएचओ की जनवरी से अप्रैल के बीच कोविड-19 महामारी पर प्रतिक्रिया को लेकर एक स्वतंत्र निरीक्षण सलाहकार समिति ने अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट भी छापी है। इसके बाद डब्ल्यूएचओ महानिदेशक ने सोमवार को यह संकल्प लिया। ग्यारह पन्नों की इस रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या महामारी को लेकर विश्व को सतर्क करने वाली डब्ल्यूएचओ की चेतावनी प्रणाली और यात्रा सलाह पर्याप्त थीं?

सलाहकार निकाय की समीक्षा और सिफारिश से अमेरिकी प्रशासन संतुष्ट नजर नहीं आया जिसने डब्ल्यूएचओ पर कोरोना वायरस महामारी से निपटने में चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले लोगों पर यात्रा प्रतिबंध लगाए जाने पर डब्ल्यूएचओ की ओर से आलोचना किए जाने का आरोप लगाया था।

ट्रंप ने रोक दी है डब्‍ल्‍यूएचओ को सहायता
चीन में ही दिसंबर में इस घातक वायरस का प्रसार शुरू हुआ जो बाद में पूरी दुनिया में फैल गया। बाद में ट्रंप ने डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता पर अस्थायी रोक लगाने का आदेश दिया था। इस बीच, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने आज कहा कि उनका देश कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए अगले दो वर्ष में विश्व स्वास्थ्य संगठन को दो अरब डॉलर की मदद उपलब्ध करायेगा।

चीन के राष्‍ट्रपति ने दी सफाई
चिनफिंग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि चीन ने डब्ल्यूएचओ और अन्य देशों को महामारी से जुड़े सभी आंकड़े समय पर उपलब्ध कराए थे। उन्होंने कहा, ‘हमने बिना कुछ छिपाए विश्व के साथ महामारी पर नियंत्रण और उपचार के अनुभव को साझा किया है।’ चिनफिंग ने कहा, ‘हमने जरूरत पड़ने पर देशों की सहायता करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव प्रयास किए।’ चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दो अरब डॉलर से कोविड-19 से निपटने के प्रयासों में, विशेषकर विकासशील देशों को मदद मिलेगी। फ्रांस, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपतियों तथा जर्मन चांसलर ने डब्ल्यूएचओ का समर्थन किया है।

WHO के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर बोले- संभव है दुनिया से कभी न जाए कोरोना वायरस

WHO के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर बोले- संभव है दुनिया से कभी न जाए कोरोना वायरसडब्ल्यूएचओ के शीर्ष अधिकारी डॉ. माइकल जे रायन ने कहा कि हो सकता है कि कोरोना इस दुनिया से कभी न जाए। डब्ल्यूएचओ हेल्थ इमर्जेंसीज प्रोग्राम के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर डॉ. रायन कहते हैं कि यह हमारे समुदाय में कभी न खत्म होने वाला वायरस बन सकता है, जो हो सकता है कभी न जाए। डॉ. माइकल जे रायन ने कहा, हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि HIV आज भी जीवित है। अमेरिका में पिछले 24 घंटे में 1813 लोगों की हुई मौत, लगातार बढ़ रही है मौतों की संख्या।

 

 
 

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