खुलासा : अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने 50 साल तक कराई भारत-पाक की जासूसी

 
  • स्विस कोड राइटिंग कंपनी के जरिए भारत-पाक की जासूसी कराती थी सीआईए
  • अमेरिकी एजेंसी के पास था स्विट्जरलैंड की इनक्रिप्टेड कंपनी का मालिकाना हक
  • स्विट्जरलैंड की क्रिप्टो एजी कंपनी के साथ सीआईए ने 1951 में किया था सौदा

अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने एक स्विस कोड राइटिंग कंपनी के जरिये कई दशक तक भारत और पाकिस्तान समेत दुनिया के उन तमाम देशों की जासूसी की, जिन पर वह नजर रखना चाहती थी। इस कंपनी के उपकरणों का उपयोग पूरे विश्व में विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा अपने जासूसों, सैनिकों और गोपनीय राजनयिकों के साथ संदेशों के आदान-प्रादान के लिए बेहद विश्वसनीय माना जाता रहा, लेकिन किसी को भी इस कंपनी का मालिकाना हक संयुक्त रूप से सीआईए और उसकी सहयोगी पश्चिमी जर्मनी की खुफिया एजेंसी बीएनडी के पास होने की भनक तक नहीं लगी। यह सिलसिला 50 साल तक चलता रहा।

अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट और जर्मनी के सरकारी ब्रॉडकास्टर जेडडीएफ ने मंगलवार को एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में कहा गया कि स्विट्जरलैंड की क्रिप्टो एजी कंपनी के साथ सीआईए ने 1951 में एक सौदा किया था, जिसके तहत 1970 में इसका मालिकाना हक सीआईए को मिल गया। रिपोर्ट में सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों के हवाले से इस बात का पर्दाफाश किया गया कि अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी जर्मनी ने सालों तक दूसरे देशों के भोलेपन का फायदा उठाया। इन्होंने उनका पैसा ले लिया और उनकी गोपनीय जानकारियां भी चुरा लीं। सीआईए और बीएनडी ने इस ऑपरेशन को पहले थेसौरस और फिर रूबीकॉन नाम दिया था।

 
 

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