मास्क और सैनिटाइडर संकट खत्म करेंगी यूपी की चीनी मिलें, मिल गया लाइसेंस

 

कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते देशभर में सैनिटाइजर के संकट को उत्तर प्रदेश पूरा करेगा। पिछले दो दिनों में कुछ चीनी मिलों को सैनिटाइजर बनाने के लाइसेंस जार कर दिये गए हैं। सोमवार को बलरामपुर चीनी मिल ने सैनिटाइजर का उत्पादन शुरू कर दिया। सीतापुर की हर गांव चीनी मिल में मंगलवार से उत्पादन शुरू हो जाएगा।

इसे देखते हुए कई अन्य चीनी मिलों व डिस्टलरी ने सैनिटाइजर के लाइसेंस  के लिए आवेदन कर दिया है। इनमें से कुछ को इसी सप्ताह लाइसेंस दे दिया जाएगा। बहुत जल्द प्रदेश में भरपूर सैनिटाइजर उत्पादन शुरू हो जाएगा।

गुजरात व पश्चिम भारत के राज्य सैनिटाइजर के बड़े उत्पादक हैं। इनमें आइसो प्रोटीन एल्कोहल से सैनिटाइजर बनाया जाता है जो प्रदेश के चीनी उद्योग के पास बहुतायत में है।

मास्क और सैनिटाइजर बनाने वालीं 60 नई इकाइयां लगेंगी
लॉकडाउन के दौरान मास्क, सैनिटाइजर, ब्रेड, बिस्किट आदि चीजों की कमी न हो इसके लिए प्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग ने योजना बनाई है। प्रदेश में सैनिटाइजर बनाने की 60 इकाइयां स्थापित की जाएंगी। साथ ही विभाग ने ब्रेड और बिस्किट बनाने वाली ब्रिटानिया की आठ फैक्ट्रियों को चालू कराया है।

एमएसएमई विभाग के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने प्रदेश के एमएसएमई इकाइयों को संचालित कराकर वहां आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन और कारीगरों को रोजगार मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।

विभाग ने मास्क और सैनिटाइजर बनाने के लिए साठ इकाइयों को नए लाइसेंस दिए हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की ओर से नगर निगम के कर्मचारियों को 10 हजार गमछे बांटे गए हैं। तीन स्तर में प्रयोग करने पर खादी का यह गमछा भी मास्क जितना ही प्रभावी हो जाता है।

कुछ कंपनियों के कोल्ड स्टोरेज में पड़ा माल भी आपूर्ति के लिए भेजा जा चुका है। विभाग पहले ही नोएडा और गाजियाबाद में लॉकडाउन के कारण बंद पड़े मास्क और सैनिटाइजर बनाने वाले कारखाने चालू कराए हैं। लखनऊ एवं कानपुर में मास्क व सैनिटाइजर बनाने वाली इकाइयों को भी शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।

कंट्रोल रूम स्थापित, सुनी जाएंगी विभाग की शिकायतें
एमएसएमई विभाग ने लॉकडाउन के दौरान विभाग से जुड़ीं इकाइयों के लिए मुख्यालय पर एक कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इसमें फोन नंबर 9415467934 पर संपर्क कर सकते हैं। यहां से उनकी शिकायत और समस्या का समाधान होगा। श्रमिकों की समस्या की सुनवाई के लिए इसमें श्रम विभाग का भी प्रतिनिधित्व है।

सभी जिलों में जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्तों को अपने-अपने क्षेत्रों में संबंधित औद्योगिक इकाइयों, उनमें काम करने वाले श्रमिकों से संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। एमएमएमई की इकाइयों के कर्मचारियों व संचालकों को जिला प्रशासन से पास जारी कराएं ताकि इकाइयां चलती रहीं।
– नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव एमएसएमई

 
 

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