पांच वर्ष तक सोये रहे भाजपाई’, सत्ता की खूब चाटी मलाई नही ली जनता की सुध

  • चुनाव आते ही फोेटो खिंचवाकर शोसल मिडिया पर डाल कर बन रहे जनता के रहनुमा
  • जनता भी इस बार ऐसे नेताआंे को जवाब देने मन बना चुकी है।

देवबंद ( खिलेन्द्र गांधी):  भाजपा सरकार के पांच साल में चन्द भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं के अलावा बाकी सब नेता और कार्यकर्ता एक के चार करने में लगे रहे, उन्होने जनता के दुःख सुख से कोई सरोकार नही रखा।

पूरे पांच वर्ष भाजपा नेता तथा निखडू कार्यकर्ता सत्ता का लाभ लेकर अपने जायज और नाजायज कामों के माध्यम से धन कमाने मे जुटे रहे उन्होने उस आम आदमी की जिसके वोट से सरकार बनने पर वह मलाई चाट रहे है, कतई परवाह नही की है। पूरे कार्यकाल में पुलिस और प्रशासन कुछ खास भाजपा नेताओं के हाथ की कठपुतली बना रहा। इसका नतीजा यह हुआ कि आम आदमी सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार की चक्की में पिस्ता रहा है। आम आदमी को अपने छोटे छोटे काम जैसे राशनकार्ड बनवाना, राशनकार्ड में सुधार, तहसील, थाने और नगरपालिका के कार्यों के लिए दर-दर भटकना पडा। आखिर परेशान होकर सुविधा शुल्क देकर काम कराना पडा। भाजपा नेताओं ने अपने चहेतों के अलावा आम आदमी का कोई कार्य नही किया मगर अब घर घर टोली बनाकर जाकर फोटो खिचवार जता रहे है, कि वो जनता के हितैषी है।

सरकार के द्वारा लॉकडाउन तथा कोरोना काल में कई लाभकारी योजनाओं को जनता के हित में दिया गया है, मगर भाजपा नेताओं ने आम आदमी के सहयोग के लिए कोई प्रयास नही किया। इसकी सच्चाई जानने के लिए नगरपालिका प्रशासन का रिकार्ड प्राप्त है, वहा से पता चलेगा कि कितने प्रतिशत आम हिन्दू तथा कितने प्रतिशत आम मुसलमान लाभान्वित हुआ है इसका बडा कारण सपा बसपा के नेता तथा कार्यकर्ताओं ने अपने समर्थकों को ढूंढ ढूंढ कर लाभ पहुंचाया जबकि भाजपा नेता तथा कार्यकर्ताओं ने किसी के लिए कार्य नही किया है। अब तमाम कार्यकर्ता बूथ लेवल तक के घर घर जाकर फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डाल कर समाजसेवी बन रहे है। पूरे पांच वर्ष तक एक गुट आम आदमियों की सेवा और सहयोग में रहा, उसको भाजपा के नेताओं झूठी झूठी शिकायते संगठन में करके घर बैठने के लिए मजबूर कर दिया । ऐसा होने से आम आदमी को भारी कठिनाई अपने छोटे छोटे कार्यों के लिए उठानी पडी है। स्थानीय जनता चुनाव में मतदान अपनी अपनी इच्छाओं के अनुरूप करेगी मगर उसके मन मे यह कसक जरूर रहेगी कि जिन्होने पांच वर्ष तक उनका तिरस्कार किया। क्या जनता अबकी बार यह सोचने को मजबूर है कि दोबारा वोट देकर ऐसे नेताओं को जिताकर उन्हे क्या मिलने वाला हैं।


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