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Exclusive Interview: जेपी नड्डा बोले, पहले कैबिनेट में 10 लाख नौकरी देने की तेजस्‍वी की घोषणा शुद्ध तौर पर जुमला

 
JP Nadda

नई दिल्‍ली। बिहार राजग की या महागठबंधन की इसे लेकर काउंटडाउन शुरू हो चुका है। बिहार में गांव- गांव हेलीकाप्टर उड़ान भर रहा है और जंगलराज, रोजगार, सुशासन, डबल इंजन, फ्री वैक्सीन, पलायन से लेकर चीन तक के मुद्दे गूंज रहे हैं। ऐसी ही दो रैली को संबोधित कर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पटना लौटते हैं तो विश्वास और उत्साह से भरे हुए। अध्यक्ष पद की कमान संभालने के बाद पहली बार दैनिक जागरण से बातचीत में कहते हैं- ‘मैं अखबारों के जरिए नहीं, व्यक्तिगत रूप ने यहां की मिट्टी को पहचानता हूं। यहां के लोगों का दर्द समझता हूं और इसीलिए कह सकता हूं डबल इंजन की सरकार बिहार के लिए जरूरी है।’ हाल ही में संगठन में बड़े बदलाव के जरिए सबको चौंका चुके नड्डा बड़ी बेबाकी से यह संदेश भी देते हैं कि भाजपा के अंदर अगले बीस पच्चीस साल का खाका तैयार हो गया है। यानी संगठन में आने वाले नए चेहरे अब लंबे समय तक दिखेंगे। यह और बात है कि बिहार में पार्टी नेतृत्व को लेकर अभी चुप्पी है। पेश है राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा से बातचीत का एक अंश-

सवाल- आपने लंबा वक्त बिहार में गुजारा है। भाजपा के शीर्ष स्तर से अब बिहार और विधानसभा चुनाव को कैसे देखते हैं?

– मुझे दुख होता है। बिहार तो शिक्षा का गढ़ रहा है। मैं सत्तर-अस्सी की बात करूं तो जो ‘हूज हू’ यानी नामी गिरामी लोगों की लिस्ट होती थी उसमें बिहार के पच्चीस तीस लोगों का नाम होता था। लेकिन, बाद में खासकर लालू जी के वक्त में तो लोगों ने बिहार छोड़ना शुरू कर दिया। गरीब, समृद्ध, शिक्षित सभी ने मजबूरी में बिहार से दूरी बना ली। दुखद यह है कि आज भी जबकि बिहार के लोग बाहर हर स्तर पर अपना योगदान दे रहे हैं, बिहार के टैलेंट का बिहार में ही इस्तेमाल नहीं हुआ। नीतीश कुमार के आने के बाद स्थिति पर नियंत्रण हुआ लेकिन केंद्र में संप्रग सरकार थी तो समर्थन नहीं मिला। सही मायने में पिछले साढ़े तीन साल में असली काम शुरू हुआ है। कुम्हरार में विश्वस्तरीय रिसर्च सेंटर खोला गया है। एम्स वापस रास्ते पर आया है। अभी 11 मेडिकल काॅलेज दिए हैं। पटना में पांच हजार बेड का अस्पताल बना रहे हैं जो देश का सबसे बड़ा अस्पताल होगा। गंगा पर काम हो रहा है। ढांचागत विकास हो रहा है। यानी पिछले तीन साढ़े तीन साल में पहली बार डबल इंजन सरकार चली है और फर्क दिखने लगा है। केंद्र में मोदी और राज्य में नीतीश की मौजूदगी से बिहार में विकास की गति और उसका आकार बढ़ेगा। यह बात जनता भी जानती है और चुनाव नतीजों में आपको यह साफ दिखेगा।

सवाल- आपने सभी विकास की बातें की, लेकिन चुनाव प्रचार में जंगलराज की ही याद दिलाई जाती है। जबकि खुद तेजस्वी यादव लालू राज की गलतियों के लिए सार्वजनिक माफी मांग चुके हैं।

– जंगलराज की याद दिलाना इसलिए जरूरी है क्योंकि आरजेडी का चरित्र अभी तक नहीं बदला है। नीतीश जी ने आरजेडी से पीछा क्यों छुड़ाया। उन्हें पता था कि जो सुशासन है वह कुशासन में बदल जाएगा। आरजेडी के पोस्टर को देख लीजिए आपको अहसास हो जाएगा। मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं। मैं तब मोदी जी के कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री था। बिहार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप ने कभी भी हमारे प्रस्तावों का जवाब नहीं दिया। मैं जो कुछ बिहार के लिए करना चाहता था, वह तब हो पाया जब तेज प्रताप हट गए। तेजस्वी का उदाहरण ले लीजिए वह विधानसभा सत्र में नहीं गए। कोरोना काल में वह बिहार से बाहर थे। जवाबदेही का कोई अहसास है उन्हें? अभी भी वही स्वभाव और आचरण, अभी भी एक खास वर्ग का समर्थन लेकर राजनीति करना, अभी भी जनता के प्रति संवेदनशून्यता, अभी भी कानून व्यवस्था के प्रति निरादर। अगर आरजेडी का चरित्र बदल गया होता तो हम जंगलराज की बात नहीं करते।

सवाल- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की अपनी पहली रैली मे अनुच्छेद 370 और गलवन का जिक्र किया था। राज्य के चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों की आप कितनी अहमियत जरूरी मानते हैं।

– हर चुनाव में सभी मुद्दे अहम होते हैं। एक जिम्मेदार और राष्ट्रीय दल के लिए यह आवश्यक होता है कि वह स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों तक को छुए। प्रधानमंत्री ने देश का विश्वास जीता है। इन मुद्दों पर पूरा देश एक है। गलवन में बिहार के सैनिकों ने शहीदी दी है। कश्मीर को लेकर तो हमलोग बचपन से नारा लगाते आए हैं कि एक देश में दो संविधान और दो निशान नहीं चलेगा। यह पूरे देश की भावना थी और प्रधानमंत्री जी ने यह पूरा करके दिया है। उसी तरह राममंदिर का भी मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने में इसलिए देरी हुई क्योंकि कांग्रेस के लोग रोड़ा अटका रहे थे। आखिर पूजन के लिए तो बिहार से भी लोग गए थे। वर्तमान सरकार ने ऐसा माहौल बनाया कि सबकुछ बहुत शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। क्या बिहार के लोगों को यह पता नहीं चलना चाहिए।

सवाल- महागठबंधन की ओर से बिहार में 10 लाख नौकरी की बात की गई थी तो नीतीश कुमार ने इसे हास्यास्पद बताया था और पूछा था कि पैसे कहां से आएंगे। भाजपा ने भी 4 लाख नौकरी और कुल 19 लाख रोजगार का वादा किया है। उसके लिए पैसे का इंतजाम कैसे करेंगे?

– हंसते हुए, इसीलिए मैं कहता हूं कि तेजस्वी और महागठबंधन को शासन- प्रशासन की जानकारी ही नहीं है। कोई भी मुझे किसी भी सरकार का कैबिनेट नोट दिखा दे, जिसके माध्यम से नौकरी दी गई हो। लेकिन, तेजस्वी कह रहे हैं कि पहले कैबिनेट में 10 लाख नौकरी दे देंगे। यह हास्यास्पद ही नहीं अज्ञानता है। शुद्ध तौर पर जुमला है। कोई उससे पूछे कि कहां नौकरी देंगे। घोषणा करनी थी कर दी। वे गुमराह कर रहे हैं। हमने जो कहा है वह व्यवहारिकता के धरातल पर है। पलायन तो लालू राज में शुरू हुआ था और अब वही लोग पलायन पर बोल रहे हैं। हमने कहा है कि रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। ढांचागत विकास और दूसरे माध्यमों से रोजगार के लिए माहौल बनाएंगे। साथ ही 4 लाख नौकरी देंगे यानी जो स्वीकृत पद खाली पड़े हैं उसे भरेंगे। उसके लिए संसाधन का इंतजाम भी होगा।

सवाल- आप स्वास्थ्यमंत्री भी रहे हैं । कोरोना वैक्सीन फ्री करने की बात केवल बिहार में क्यों। यह पूरे देश में या फिर भाजपा अध्यक्ष के नाते सभी भाजपा शासित राज्यों में फ्री क्यों नहीं?

– बिहार में तो इसलिए यह विषय लाया गया क्योंकि एक राजनीतिक दल के नाते हमें अपनी सोच रखनी है। मोदी जी सारे देश के लिए सजग हैं। इसी का कारण है कि हमने टीकाकरण में हेपेटाइटिस बी और फिर टीबी को भी इसमें शामिल किया। हमलोगों ने एचआइवी के लिए टेस्ट और ट्रीट भी फ्री कर दिया। यानी हर किसी के स्वास्थ्य को लेकर राजग सरकार सचेत है और रहेगी।

सवाल- तो क्या माना जाए कि आने वाले दिनों में पूरे देश के लिए फ्री कोरोना वैक्सीन की घोषणा हो सकती है?

– मैं ने कहा कि मोदी सरकार बहुत संवेदनशील है। लेकिन मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता हूं क्योंकि यह फैसला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और प्रधानमंत्री को लेना है।

सवाल- वर्ष 2005 में भी भाजपा नीतीश कुमार के चेहरे के साथ लड़ी थी। आज भी नीतीश ही राजग के चेहरे हैं। भाजपा अपना कोई चेहरा क्यों नहीं तैयार कर पाई है?

– हम तब भी गठबबंधन में चुनाव लड़े थे, आज भी गठबंधन मे हैं और नीतीश जी हमारे मुख्यमंत्री का चेहरा हैं। लीडरशिप निर्माण एक लंबी चलने वाली प्रक्रिया होती है। बिहार मे हमारे पास कई नेता हैं। समझदार, सशक्त, अच्छी छवि सबकुछ है। हम इस विषय को लेकर संवेदनशील हैं। लेकिन अभी तो एक स्थापित और अच्छी छवि के नीतीश कुमार जी हमारे चेहरे हैं।

सवाल- क्या 2025 तक भाजपा का कोई चेहरा होगा।

– अभी से कुछ कहना तो मुश्किल है। फिलहाल तो अगले पांच साल तक नीतीश जी ही हमारे मुख्यमंत्री हैं।

सवाल- बिहार में लोजपा के राजग से अलग होने का आप कितना नुकसान देखते हैं।

– हम तो चाहते थे कि वह रहें लेकिन चले गए। मैं इतना कहूंगा कि भाजपा का वोट और गैर महागठबंधन वोट भाजपा के साथ ही है। इसलिए कोई चुनावी नुकसान नहीं होगा।

सवाल- लेकिन पार्टी अध्यक्ष के तौर पर क्या आपको लगता है कि शिवसेना, अकाली दल, टीडीपी, लोजपा जैसे पुराने साथियों को वापस लाने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए?

– भाजपा ने अपनी ओर से कभी भी ऐसा व्यवहार नहीं किया, जिससे कारण वह गए हैं। सभी अपनी- अपनी राजनीतिक मजबूरी और सोच के कारण बाहर गए हैं। बादल साहब ने तो कृषि सुधार का सार्वजनिक रूप से स्वागत किया था लेकिन कांग्रेस के दबाव में छोड़ गए। शिवसेना को सरकार बनानी थी। लोजपा की अपना महत्वाकांक्षा थी।

सवाल- पंजाब में पहले से भी संगठन महाराष्ट्र की तर्ज पर अकेले चलने की बात करता रहा है। अकाली के जाने के बाद क्या यह अवसर है?

– देखिए अगर कोई आता है तो बहुत अच्छा। लेकिन यह तय है कि भाजपा पंजाब समेत सभी राज्यों में अपनी तरह से उतरेगी। पार्टी को अपनी क्षमता के अनुसार बढ़ने का अधिकार है और उसे पूरा समर्थन मिलेगा।

सवाल- पंजाब विधानसभा ने कृषि सुधार कानून को निरस्त करने का विधेयक पास कर दिया। छत्तीसगढ़, राजस्थान समेत दूसरे राज्यों ने भी यही करने की बात की है। क्या लगता है कि इस कानून के कारण संघीय ढांचे पर चोट पहुंची है?

– जो कुछ हो रहा है वह विशुद्ध राजनीति है। पंजाब में विरोध किसान नहीं राजनीतिक दल कर रहे हैं। जाकर देख लीजिए, वहीं के किसान सबसे दुखी हैं। नरेंद्र मोदी सरकार की प्राथमिकता है आम जनता, किसान की भलाई। वहां के किसानों को मोदी जी ने स्वतंत्रता दी है। कांग्रेस की परेशानी यह है कि वह मोदी जी का विरोध करते करते देश के हित का विरोध करने लगती है। इस विषय में भी यही हो रहा है।

सवाल- अगर संगठन की बात की जाए तो आपने अपनी नई टीम बनाने में काफी वक्त लगा दिया। उसके बाद इतना फेरबदल कर दिया कि सबको चौंका दिया। क्या मकसद है?

– मैं जब युवा मोर्चा का अध्यक्ष था तब भी देर से ही टीम बनाई थी। मैं ने राजनाथ जी से चार्ज लिया था। और तब मुख्तार अब्बास नकवी, शिवराज सिंह चौहान, ओम बिरला जैसे कई चेहरे को शामिल किया था। आज सभी जाने पहचाने नाम हैं। अभी भी आने वाले पंद्रह बीस साल तक पार्टी को संभालने वाले लोगों को जोड़ा गया है। कई लोग जो दो तीन टर्म रह चुके थे उनकी जगह नए लोगों को शामिल किया गया। और यह सबकुछ बहुत चर्चा के बाद किया गया।

सवाल- क्या संसदीय बोर्ड में भी कुछ चौंकाने वाले बदलाव होंगे?

– जो जरूरी है वह होंगे। अगर किसी को चौंकना है तो चौंक जाए।

 
 

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