विश्व पुस्तक दिवस पर जान की चाबी पुस्तकें विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

विश्व पुस्तक दिवस पर जान की चाबी पुस्तकें विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
  • सहारनपुर में आयोजित संगोष्ठी में अतिथियों का स्वागत करते आयोजक।

सहारनपुर। सारंग सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन के तत्वावधान में विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर ज्ञान की चाबी पुस्तकें विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देना और पुस्तकों के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना रहा। जनक नगर स्थित एम.जी.एम. स्कूल में कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की अध्यापिका जेबा सेठ ने अपने प्रेरक विचारों के साथ की।

उन्होंने कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र होती हैं, जो जीवन के हर मोड़ पर हमारा मार्गदर्शन करती हैं। मुख्य अतिथि अरुण सूरी ने अपने संबोधन में बताया कि विश्व पुस्तक दिवस की शुरुआत वर्ष 1995 में यूनेस्को द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य पाठकों में पुस्तकों के प्रति रुचि और आकर्षण बढ़ाना है। संस्था के महासचिव रवि बख्शी ने कहा कि पुस्तकें विद्यार्थियों की सच्ची साथी होती हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखती हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जो व्यक्ति पुस्तकों से प्रेम करता है, वह कभी अकेला नहीं होता।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार रमेश चंद्र छबीला ने अपने उद्बोधन में कहा कि पुस्तकें केवल कागज और शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि अनुभव, ज्ञान और प्रेरणा का अनमोल खजाना होती हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य सौरभ सिंगल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि पुस्तकें हमें सही और गलत में अंतर करना सिखाती हैं तथा जीवन के कठिन समय में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं, इसलिए इन्हें कभी भी रद्दी में नहीं बेचना चाहिए। इस अवसर पर नमिता मेघा ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से अध्ययन करने और अपने ज्ञान को निरंतर बढ़ाने का संदेश दिया।

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