शेखुलहिंद मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने की मांग पर विवाद, मौलाना इसहाक गोरा सपा नेता से नाराज

शेखुलहिंद मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने की मांग पर विवाद, मौलाना इसहाक गोरा सपा नेता से नाराज

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थित शेखुलहिंद मेडिकल कॉलेज को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता मनोज चौधरी ने एक कार्यक्रम में इस कॉलेज का नाम बदलने की बात कही, जिसके बाद इलाके के उलेमा और मुस्लिम समाज में नाराज़गी बढ़ गई है.

इस मामले पर मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि इस तरह के बयान बेहद गैर-जिम्मेदाराना हैं.उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को मुसलमानों का हितैषी बताते हैं, उन्हें ऐसे बयान देने से पहले इतिहास की सही जानकारी लेनी चाहिए.

नेता को शेखुलहिंद की जानकारी नहीं

मौलाना ने कहा, “जिस व्यक्ति ने यह बयान दिया है, उसे शायद यह भी नहीं मालूम कि शेखुलहिंद कौन थे.अगर जानकारी नहीं है तो अपनी पार्टी के बड़े नेताओं से पूछ लेना चाहिए.नेता बनने से पहले इतिहास समझना जरूरी है.”

उन्होंने बताया कि मौलाना महमूद हसन, जिन्हें शेखुलहिंद के नाम से जाना जाता है, भारत की आजादी की लड़ाई के बड़े नेता थे. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई और जेल भी गए.उनका नाम देश के सम्मान और कुर्बानी से जुड़ा है.ऐसे महान व्यक्ति के नाम को बदलने की बात करना उनके योगदान का अपमान है.

राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए

मौलाना ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए.उन्होंने कहा कि असली जरूरत यह है कि अस्पताल में सुविधाएं बेहतर हों, मरीजों को अच्छा इलाज मिले और गरीब लोगों को राहत मिले. नाम बदलने की बहस से आम जनता को कोई फायदा नहीं होगा.

उन्होंने साफ कहा कि संबंधित नेता को खुले तौर पर माफी मांगनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता, तो ऐसे लोग मुसलमानों के हितैषी नहीं कहे जा सकते. मौलाना ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी इस मामले पर अपनी स्थिति साफ करने की मांग की है.

नाम बदलने के कई मामले हो चुके

गौरतलब है कि देश में कई बार ऐतिहासिक जगहों और संस्थानों के नाम बदलने को लेकर विवाद होते रहे हैं.ऐसे मामलों में अक्सर इतिहास, पहचान और राजनीति आपस में टकराते नजर आते हैं. इस घटना ने एक बार फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विकास से ज्यादा जरूरी नाम बदलना है, या फिर लोगों की असली जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए.


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