शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह और शोभित सम-विश्वविद्यालय, मेरठ ने बेंगलुरु आश्रम में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी की उपस्थिति में श्री श्री विश्वविद्यालय, के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
गंगोह [24CN] : मूल्य-आधारित उच्च शिक्षा, समग्र शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणालियों और अंतर्विषयक शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, श्री श्री विश्वविद्यालय ने बेंगलुरु स्थित ‘द आर्ट ऑफ़ लिविंग आश्रम’ के शांत परिसर में शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह और शोभित सम-विश्वविद्यालय, मेरठ के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का समारोह गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी की गरिमामयी उपस्थिति और आशीर्वाद के बीच संपन्न हुआ; शिक्षा को मानवीय मूल्यों, आंतरिक कल्याण और सामाजिक सद्भाव के साथ जोड़ने का उनका दृष्टिकोण दुनिया भर के संस्थानों को लगातार प्रेरित करता रहा है।
श्री श्री विश्वविद्यालय की ओर से, विश्वविद्यालय की प्रेसिडेंट डॉ. राजिता कुलकर्णी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। शोभित संस्थानों की ओर से, शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री कुँवर शेखर विजेंद्र जी की उपस्थिति में, शोभित विश्वविद्यालय के वाइस प्रेसिडेंट श्री अभिनव शोभित जी ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री कुँवर शेखर विजेंद्र जी ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को पारंपरिक डिग्री ढांचों से आगे बढ़कर बौद्धिक, नैतिक और मानवीय विकास के केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का भविष्य केवल तकनीकी रूप से उन्नत संस्थानों का ही नहीं होगा, बल्कि उन संस्थानों का होगा जो ज्ञान को विवेक के साथ, नवाचार को जिम्मेदारी के साथ, और पेशेवर उत्कृष्टता को आंतरिक संतुलन के साथ जोड़ने में सक्षम हैं। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत की सभ्यतागत ज्ञान परंपराएं, जब समकालीन शैक्षणिक प्रणालियों और वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ एकीकृत होती हैं, तो वे एक अधिक मानवीय और टिकाऊ वैश्विक भविष्य के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकती हैं।
इस सहयोग का उद्देश्य समग्र शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, भारतीय ज्ञान प्रणालियों, योग, आयुर्वेद, चेतना अध्ययन, उद्यमिता, कौशल विकास, तथा छात्र एवं संकाय विनिमय पहलों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सार्थक शैक्षणिक जुड़ाव को बढ़ावा देना है। इस साझेदारी से संयुक्त सम्मेलनों, अनुसंधान परियोजनाओं, पाठ्यक्रम संवर्धन और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण की व्यापक परिकल्पना के अनुरूप समुदाय-उन्मुख कार्यक्रमों को भी प्रोत्साहन मिलने की अपेक्षा है।
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी के साथ हुई चर्चा में विश्वविद्यालयों की उस व्यापक भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया, जिसके तहत वे सामाजिक रूप से जागरूक नेतृत्व, भावनात्मक दृढ़ता, नैतिक निर्णय लेने की क्षमता और सेवा-उन्मुख संस्थागत संस्कृति को पोषित करते हैं।
यह समारोह आत्मीयता, सादगी और एक साझा उद्देश्य की भावना एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ मानवीय मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के संगम का प्रतीक था। सहभागी संस्थानों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग ऐसे परिवर्तनकारी शैक्षिक ढांचा तैयार करने में सार्थक योगदान देगा, जिनकी जड़ें भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत में गहरी जमी होंगी, और जो साथ ही वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक और भविष्योन्मुखी भी होंगे।
