संत रविदास की शिक्षाओं को जीवन में उतारने का आह्वान
सहारनपुर। सतगुरु रविदास विद्वत सभा पश्चिम उत्तर प्रदेश एवं श्री सतगुरु रविदास आश्रम दाबकी जुनारदार के तत्वावधान में सनातन समरसता संगोष्ठी एवं मासिक सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संत रविदास जी महाराज की शिक्षाओं और उनके सामाजिक समरसता के संदेश पर विस्तार से चर्चा की गई। साध संगत से संत रविदास की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात रविदासी संत जगरामदास जी महाराज ने की, जबकि संचालन महंत भूपेंद्रदास जी ने किया। सतगुरु रविदास विद्वत सभा के संरक्षक एवं हिन्दू जागरण मंच पश्चिम उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुर सूर्यकांत सिंह मुख्य अतिथि रहे।
साध संगत को संबोधित करते हुए ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने कहा कि गुरु रविदास जी ने अपनी कर्मप्रधान शिक्षाओं के माध्यम से समाज को निष्काम कर्म, सदाचार और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उनकी वाणी आज भी समाज को सही दिशा देने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का संदेश व्यक्ति को काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों का त्याग कर मन को पवित्र बनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने गुरु रविदास जी की वाणी ‘कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति के लिए मनुष्य को अपने भीतर के विकारों से दूर रहना आवश्यक है। वहीं ‘ऐसा चाहूं राज मैं, मिलै सभी को अन्न’ के माध्यम से संत रविदास जी ने सभी के कल्याण, समानता और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील समाज की कल्पना प्रस्तुत की।
उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की बेगमपुरा की अवधारणा ऐसे समाज का संदेश देती है, जो व्यसन, कष्ट, दरिद्रता और रोग जैसी समस्याओं से मुक्त हो। वर्तमान समय में भी इन शिक्षाओं की प्रासंगिकता बनी हुई है। उन्होंने साध संगत से संत रविदास जी के विचारों को केवल सुनने तक सीमित न रखकर उन्हें अपने आचरण और दैनिक जीवन में उतारने का आह्वान किया।
हिन्दू जागरण मंच के महानगर अध्यक्ष रामदीप बंसल ने सामाजिक समरसता को मजबूत करने और समाज में आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने की अपील की।
इस दौरान रजत गोयल, अनुज त्यागी, वंश राणा, प्रताप सिंह, देवेंद्र सिंह, घनश्याम, जसबीर, राज चावला, आलोक कुमार, दिग्विजय सिंह, राजवंश राणा, शिवम जोगी, प्रभाष सैनी सहित बड़ी संख्या में साध संगत मौजूद रही।
