जयंत चौधरी का विपक्ष के प्रदर्शन पर सवाल- राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद भी सड़कों पर क्यों डटे हैं? अखिलेश पर भी साधा निशाना
नई दिल्ली। दिल्ली में जारी विपक्षी दलों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने आंदोलन के औचित्य पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब विपक्षी दल राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपनी बात रख चुके हैं, तो इसके बावजूद सड़कों पर लगातार प्रदर्शन करने का क्या मतलब है? जयंत चौधरी ने राजधानी में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सोमवार को हाथरस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जयंत चौधरी ने दिल्ली के मौजूदा हालात पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।
लोकतंत्र में विरोध का भी एक तरीका होता है: जयंत चौधरी
दिल्ली में युवाओं के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए रालोद अध्यक्ष ने विपक्षी दलों की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए भी एक उचित तरीका होना चाहिए।
चौधरी ने सवाल किया कि जब विपक्ष के नेता राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपनी शिकायतें और मांगें उनके सामने रख चुके हैं, तो इसके बाद भी लगातार सड़कों पर डटे रहना कितना उचित है?
उन्होंने दिल्ली में पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का बचाव करते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा उठाए जा रहे सुरक्षा संबंधी कदमों का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अखिलेश यादव पर भी साध चुके हैं निशाना
दिल्ली के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देने से पहले जयंत चौधरी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर भी अपने बयानों से राजनीतिक चर्चा में रहे हैं।
आगरा जिले की फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित राष्ट्रीय लोकदल की ‘स्वाभिमान रैली’ को संबोधित करते हुए उन्होंने अखिलेश यादव का नाम लिए बिना उन पर परोक्ष रूप से निशाना साधा था।
जयंत चौधरी ने कहा था कि कुछ लोगों ने उन पर राजनीतिक हमले किए, लेकिन उनके कई तीर लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए। उन्होंने अपनी राजनीतिक कीमत आंकने वालों को जवाब देते हुए कहा कि जो लोग उन्हें एक चवन्नी के बराबर भी नहीं समझते, उनसे वह कहना चाहते हैं कि वह तो ब्रज की धूल के बराबर भी नहीं हैं।
‘चवन्नी’ वाले बयान से फिर गरमाई सियासत
दरअसल, जयंत चौधरी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक दूरियां बढ़ने के बाद से ‘चवन्नी’ वाला बयान लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। रालोद प्रमुख अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस टिप्पणी के जरिए राजनीतिक विरोधियों पर पलटवार करते रहे हैं।
फतेहपुर सीकरी की स्वाभिमान रैली में भी उनके बयान को इसी राजनीतिक खींचतान से जोड़कर देखा गया।
पश्चिमी यूपी में रालोद ने तेज की चुनावी तैयारियां
दूसरी ओर, आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय लोकदल ने अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। जयंत चौधरी लगातार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं।
इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के साथ-साथ रालोद अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक दृष्टि से पश्चिमी उत्तर प्रदेश रालोद के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में जयंत चौधरी की लगातार हो रही रैलियों और विपक्ष पर उनके तीखे बयानों को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों पर जयंत चौधरी की ताजा प्रतिक्रिया ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आंदोलन के तौर-तरीकों तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को हवा दे दी है।
