गांधी परिवार की संपत्तियों पर रोक लगाने से HC का इनकार, ED को नहीं मिली राहत
नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार से जुड़ी संपत्तियों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिल्ली हाई कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है. हाई कोर्ट ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की कुर्क की गई संपत्तियां छुड़ाने के लिए PMLA अपीलीय न्यायाधिकरण जाने से रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया.
जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत ने साफ किया कि वह इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर रही है. ED ने यह याचिका उस ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की है, जिसमें गांधी परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था.
ED का दावा- आदेश का इस्तेमाल कर संपत्तियां छुड़ाने की कोशिश
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि संबंधित कंपनियां ट्रायल कोर्ट के आदेश का इस्तेमाल कर कुर्क की गई संपत्तियों को छुड़ाने के लिए PMLA अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख कर रही हैं.
एजेंसी चाहती थी कि संपत्तियों को छुड़ाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश दिया जाए. हालांकि, हाई कोर्ट ने फिलहाल ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया. इससे संपत्तियों को लेकर कानूनी लड़ाई जारी रहने का रास्ता खुला है.
ट्रायल कोर्ट ने ED की शिकायत पर क्यों उठाए थे सवाल?
इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने 16 दिसंबर, 2025 को ED की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था. अदालत का कहना था कि ED की अभियोजन शिकायत कानून के तहत सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि यह PMLA के तहत तय अपराध से जुड़ी FIR पर आधारित नहीं थी.
ट्रायल कोर्ट के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर निजी शिकायत पर हुई थी. उसी शिकायत पर मजिस्ट्रेट ने सुनवाई करते हुए संज्ञान लिया था और आरोपियों को समन जारी किए थे. यानी ED की कार्रवाई किसी निर्धारित अपराध से जुड़ी FIR के बजाय निजी शिकायत के आधार पर शुरू हुई कार्यवाही पर टिकी थी.
राहुल और सोनिया गांधी के खिलाफ ED की कार्रवाई
ED ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में नई अभियोजन शिकायत दाखिल की थी. एजेंसी ने PMLA की धारा 44 और 45 के तहत कार्रवाई की मांग की. शिकायत में धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध और धारा 4 के तहत सजा का प्रावधान लागू होने का दावा किया गया. ED ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट से राहत मांगी है. हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई के दौरान अभी कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई है.
क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
यह पूरा विवाद नेशनल हेराल्ड अखबार की प्रकाशक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के अधिग्रहण और उसकी संपत्तियों से जुड़ा है. साल 2010 में यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL) नाम की कंपनी बनी. ED के आरोपों के मुताबिक, इस कंपनी ने कांग्रेस से AJL का करीब 90 करोड़ रुपये का कर्ज 50 लाख रुपये में हासिल किया था. इसके बाद YIL का AJL पर नियंत्रण हो गया.
AJL के पास मौजूद संपत्तियों की कीमत 2,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई. सोनिया गांधी और राहुल गांधी की YIL में बहुमत हिस्सेदारी रही है. ED का आरोप है कि कांग्रेस से जुड़े वित्तीय लेन-देन के जरिए AJL की कीमती संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करने की साजिश की गई. एजेंसी इस पूरे लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग के नजरिए से जांच रही है. हालांकि, ये आरोप हैं और इन पर अंतिम न्यायिक फैसला होना बाकी है.
661 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी जांच के घेरे में
इस मामले में ED ने AJL से जुड़ी करीब 661 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कब्जा लेने की कार्रवाई भी शुरू की है. ये संपत्तियां मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत कुर्की की कार्रवाई से जुड़ी हैं. अब संपत्तियों को छुड़ाने की कोशिश और ED की शिकायत पर संज्ञान लेने से जुड़े विवाद दोनों मोर्चों पर कानूनी लड़ाई जारी है.
