CEC विवाद में 13 को फिर प्रदर्शन, महागठबंधन के MLA ने कहा- ‘देशभर में…’
मुख्य चुनाव आयुक्त के मामले में विपक्ष शांत होता नहीं दिख रहा है. महागठंबधन में शामिल सीपीआई (एमएल) के विधायक संदीप सौरव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एआईएसए और आरवाईए की ओर से प्रस्तावित मार्च की सोमवार (12 अक्टूबर) को जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि दोनों संगठनों के कार्यकर्ता पटना के गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च निकालेंगे. इस दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों और कथित कार्रवाई के खिलाफ भी विरोध जताया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और कार्यकर्ता लोकतंत्र तथा चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने की मांग उठाएंगे.
‘देशभर में चल रहे आंदोलनों में…’
संदीप सौरव ने आईएएनएस से कहा कि देशभर में चल रहे आंदोलनों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की प्रमुख भूमिका रही है. एआईएसए और आरवाईए की ओर से अगले दिन पटना में मार्च आयोजित किया जाएगा. इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर बनाए गए माहौल के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया जाएगा.
उन्होंने कहा कि दिल्ली में असहमति और शांतिपूर्ण विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है. युवा अपने अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरेंगे. बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही विपक्ष की ओर से लोकभवन मार्च निकाला गया था. तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी, कांग्रेस के बिहार अध्यक्ष राजेश राम आदि शामिल थे.
दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के बजाय अन्य स्थानों के विकल्प दिए जाने के मुद्दे पर सौरव ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के विभिन्न विभागों और दिल्ली मेट्रो को नोटिस जारी कर सड़कों और मेट्रो सेवाओं को बंद करने और बैरिकेडिंग जैसे कदमों पर सवाल किए हैं.
‘व्यापक प्रतिबंध लगाना उचित नहीं’
सौरव ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के लिए व्यापक प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है. लोकतंत्र में असहमति के लिए जगह होनी चाहिए और सरकार को विरोध करने वालों से संवाद करना चाहिए. प्रस्तावित मार्च के दौरान पुलिस की भूमिका पर संदीप सौरव ने कहा कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर सकती है, क्योंकि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसका काम है.
विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के मिलने से इनकार किए जाने के मुद्दे पर सौरव ने कहा कि इस पूरे मामले में न्यायपालिका का हस्तक्षेप जरूरी है. मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते, तो मौजूदा स्थिति पैदा नहीं होती. करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटने और उत्तर प्रदेश में 16 लाख अज्ञात नाम जोड़े जाने जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कमजोर होना लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
संदीप सौरव ने पुलिस से अपील की है कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालने दिया जाए. सौरव ने कहा कि उनका उद्देश्य लोकतंत्र, संविधान और निष्पक्ष चुनाव की मांग को मजबूती से उठाना है.
