भरत मिलाप लीला के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर
सुपर क्लब के कलाकारों ने सशक्त अभिनय से छोड़ी अमिट छाप, श्रीराम की चरण पादुका लेकर लौटे भरत के प्रसंग पर गूंज उठी तालियां
सहारनपुर। सुपर क्लब गोपाल नगर, नुमाइश कैंप के तत्वावधान में आयोजित 33वें रामलीला एवं दशहरा महोत्सव में भरत मिलाप लीला का रोचक और भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लीला के दौरान भाई प्रेम, त्याग, मर्यादा और वचन पालन के प्रसंगों ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। विशेष रूप से भरत द्वारा भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह करने और उनकी चरण पादुका लेकर शासन चलाने के संकल्प पर दर्शकों ने तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
रामलीला के प्रख्यात निर्देशक संजय सौदाई के कुशल निर्देशन में मंचित लीला में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास जाने तथा राजा दशरथ के देहावसान की सूचना भरत और शत्रुघ्न को अपने ननिहाल से अयोध्या लौटने पर मिलती है। यह समाचार सुनकर भरत व्यथित हो उठते हैं। वह अपनी माता कैकेयी को उनके निर्णय के लिए कठोर शब्दों में फटकार लगाते हैं। वहीं, शत्रुघ्न मंथरा को उसके कृत्य के लिए जिम्मेदार मानते हुए महल से बाहर निकाल देते हैं।
इसके बाद भरत, शत्रुघ्न, माता कैकेयी और माता कौशल्या सहित भगवान श्रीराम से मिलने वन की ओर जाते हैं। उनकी ओर बढ़ती भीड़ को देखकर लक्ष्मण को पहले आशंका होती है कि कहीं वे युद्ध के इरादे से तो नहीं आ रहे, लेकिन भगवान श्रीराम उनकी आशंका दूर करते हुए उन्हें धैर्य रखने का संदेश देते हैं।
भरत के त्याग और भाई प्रेम ने जीता दर्शकों का दिल
लीला के सबसे भावुक प्रसंग में भरत भगवान श्रीराम को राजा दशरथ के देहावसान की जानकारी देते हुए उनसे अयोध्या लौटकर राजपाट संभालने का आग्रह करते हैं। हालांकि, भगवान श्रीराम पिता को दिए वचन और रघुकुल की मर्यादा का हवाला देते हुए वनवास पूरा करने के अपने संकल्प पर अडिग रहते हैं।
इसके बाद भरत भगवान श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटने और उन्हीं को सिंहासन पर विराजमान मानकर शासन चलाने की बात कहते हैं। भरत के इस त्याग, समर्पण और भ्रातृ प्रेम के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया और पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।
कलाकारों के अभिनय ने बांधा समां
भगवान श्रीराम की भूमिका में कुशाग्र नैब, लक्ष्मण के रूप में अक्षय सूरी और माता सीता की भूमिका में तनु शर्मा ने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। भरत के रूप में बंटी ईश पूजानी, शत्रुघ्न के रूप में पंकज मिड्ढा, कैकेयी के रूप में अंजलि रावत, कौशल्या के रूप में अंजलि शर्मा, सुमित्रा के रूप में नेहा वर्मा, सुमंत के रूप में उदय ग्रोवर और मंथरा के रूप में अमन कालडा ने अपने अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया।
हास्य कलाकार जंग बहादुर ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को खूब गुदगुदाया। पूर्व में हुई बारिश के बावजूद लीला देखने के लिए सैकड़ों महिला-पुरुष मौजूद रहे और कार्यक्रम के अंत तक दर्शक मंचन से जुड़े रहे।
क्लब पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का रहा सहयोग
क्लब के महामंत्री अनिल रसवंत के प्रभावशाली संचालन में आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने में क्लब अध्यक्ष राकेश सूरी, गगन मेहंदीरत्ता, पिंचू गुम्बर, पंकज गुम्बर, अनुभव कत्याल, अक्षय सूरी, शिवम वर्मा, मानसी सूरी, सोनू भाटिया, विपिन टुटेजा, गगन नागपाल और पंकज मिड्ढा सहित अन्य सदस्यों का उल्लेखनीय योगदान रहा।
पात्रों की रूप सज्जा का कार्य विजय और संदीप ने किया, जबकि कलाकारों को पात्रों के अनुरूप परिधान उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी विजय आहूजा ने निभाई।
