देहरादून के उस्ताद शायर जिया नेहटौरी का निधन, 87 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

देहरादून के उस्ताद शायर जिया नेहटौरी का निधन, 87 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

60 वर्षों से अधिक समय तक उर्दू-हिंदी साहित्य की सेवा की, 40 साल तक फोटो स्टूडियो से लोगों को दी निःशुल्क सेवाएं; साहित्य जगत में शोक की लहर

देहरादून। उर्दू और हिंदी साहित्य जगत के वरिष्ठ शायर जिया नेहटौरी का मंगलवार सुबह लंबी बीमारी के बाद मेहुवाला में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। जिया नेहटौरी ने छह दशक से अधिक समय तक देहरादून में उर्दू और हिंदी साहित्य की सेवा की। अपनी सादगी, खुद्दारी और साहित्य के प्रति समर्पण के लिए पहचाने जाने वाले जिया ने कई शायरों और कवियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

प्रेस फोटोग्राफर और फाइन आर्ट के भी थे माहिर

जिया नेहटौरी केवल एक उस्ताद शायर ही नहीं, बल्कि पेशे से प्रेस फोटोग्राफर और फाइन आर्ट के जाने-माने चित्रकार भी थे। धामावाला स्थित कमल मार्केट में उन्होंने करीब 40 वर्षों तक अपना फोटो स्टूडियो चलाया। इस दौरान उन्होंने लोगों को निःशुल्क सेवाएं भी दीं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बेहद सादगी और आपसी सद्भाव के साथ गुजारी तथा साहित्य और समाज के प्रति अपने दायित्वों को हमेशा प्राथमिकता दी।

खुद्दारी के साथ गुजारी जिंदगी, नए शायरों को किया प्रोत्साहित

उत्तराखंड भाषा संस्थान के सदस्य और उर्दू अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय शायर अफजल मंगलोरी ने जिया नेहटौरी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिया जी ने जीवनभर किराए के मकान में रहने के बावजूद कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया और हमेशा स्वाभिमान के साथ जीवन व्यतीत किया।

अफजल मंगलोरी के मुताबिक, जिया नेहटौरी ने अनेक शायरों और कवियों को प्रोत्साहित किया तथा उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के लिए आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनका जीवन सादगी, आत्मसम्मान और साहित्य के प्रति निष्ठा की मिसाल रहा।

मुख्यमंत्री से मरणोपरांत सम्मान दिलाने की करेंगे मांग

अफजल मंगलोरी ने कहा कि वह जिया नेहटौरी के साहित्यिक योगदान और समाजसेवा को देखते हुए उनके परिवार को मरणोपरांत सम्मान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर निवेदन करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यकारों का योगदान समाज की अमूल्य धरोहर है और उनकी सेवाओं को उचित सम्मान मिलना चाहिए।

परिवार में एक बेटा और दो बेटियां

जिया नेहटौरी अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियां छोड़ गए हैं। उनके निधन पर शायर अंबर खरबंदा, असलम खतौलवी, मोनिका मंतशा, डोली डबराल, अफजल मंगलोरी, विजय द्रोणी, आर.ए. खान और दर्द गढ़वाली सहित अनेक लोगों ने शोक संवेदना व्यक्त की।

मंगलवार शाम मेहुवाला में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके निधन से देहरादून ने साहित्य, कला और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्र में लंबे समय तक योगदान देने वाली एक महत्वपूर्ण शख्सियत को खो दिया।

Leave a Reply