UP Election 2022: यूपी की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर की पार्टी, बोले- ‘हमारे साथ छल हुआ’

UP Election 2022: यूपी की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर की पार्टी, बोले- ‘हमारे साथ छल हुआ’
  • आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने ग्रेटर नोएडा में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की सभी सीटों पर उनकी पार्टी चुनाव लड़ेगी।

ग्रेटर नोएडा। आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने ग्रेटर नोएडा में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है। 2 महीने में छल हुआ। उन्होंने कहा कि विधानसभा की सभी सीटों पर उनकी पार्टी चुनाव लड़ेगी। मंगलवार को 33 उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि छोटे-छोटे दलों से बातचीत अभी भी चल रही है। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ उनकी पार्टी प्रत्याशी नहीं उतारेगी।

आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने कहा कि उनकी लड़ाई केवल भाजपा से है। अगर पार्टी कहेगी तो गोरखपुर से चुनाव भी लडूंगा।उन्होंने कहा कि मेरे साथ एक पार्टी के नेता से 25 सीटों पर बात हुई थी। जिन नेता से बात हुई थी अब उनके साथ नहीं जायेंगे।

बता दें कि चंद्रशेखर आजाद समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहते थे। लेकिन सीट बंटवारों को लेकर सहमति नहीं बनी। कहा तो यह भी जा रहा है कि चंद्रशेखर ने गठबंधन के लिए कांग्रेस से भी संपर्क किया था लेकिन बात नहीं बनी।

10 फरवरी को होगा मतदान

जिले की तीन विधानसभा सीटों के लिए 10 फरवरी को मतदान होना है। सभी प्रमुख पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। हर कोई वोटर को अपने पक्ष में करने में लगा हुआ है। चुनाव से पहले सभी पार्टियां महिला, नौजवान और दलितों को अपने साथ लेकर चलने की बात करती हैं, लेकिन मतदान के बाद चुनावी वादों पर धूल जम जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि जो प्रत्याशी समस्याओं का समाधान का आश्वासन देगा उसी को वोट दिया जाएगा।

दैनिक जागरण की चुनावी चौपाल में क्षेत्र के गांव नंगला पदम सिंह के लोगों ने बेबाकी से समस्याओं पर अपनी राय रखी। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क उखड़ गई हैं। पोखर ओवरफ्लो होने से गलियों में पानी भर जाता है। गांव में पंचायत घर अस्पताल, लाइब्रेरी नहीं है। लाभार्थियों को वृद्धा व दिव्यांग पेंशन नहीं मिल पा रही है। प्राधिकरण की लापरवाही से गांव की सफाई व्यवस्था भी लचर रहती है। पंचायत राज व्यवस्था समाप्त होने के बाद ग्रामीणों को जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है।

 


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