बाबा साहेब के संविधान की ताकत ने ही मुझे महापौर की कुर्सी तक पहुंचाया: डॉ. अजय कुमार

बाबा साहेब के संविधान की ताकत ने ही मुझे महापौर की कुर्सी तक पहुंचाया: डॉ. अजय कुमार
सहारनपुर के जीआईसी सभागार में आयोजित ‘एक शाम संविधान निर्माता के नाम’ कार्यक्रम में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को नमन करते महापौर डॉ. अजय कुमार एवं अन्य अतिथिगण।

मेला गुघाल में सजी ‘एक शाम संविधान निर्माता के नाम’, वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर के विचारों को बताया सामाजिक समानता और न्याय का आधार

सहारनपुर। ऐतिहासिक मेला गुघाल के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में नगर निगम की ओर से जीआईसी सभागार में ‘एक शाम संविधान निर्माता के नाम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन, संघर्ष और सामाजिक न्याय के लिए किए गए उनके अतुलनीय योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करते हुए समानता, शिक्षा और बंधुत्व पर आधारित समाज के निर्माण का आह्वान किया।

बाबा साहेब के संविधान ने दिया आगे बढ़ने का अवसर: महापौर

कार्यक्रम में महापौर डॉ. अजय कुमार ने तथागत भगवान बुद्ध और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहेब का योगदान अद्वितीय और अविस्मरणीय है। उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों को लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव बनाया।

महापौर ने भावुक होते हुए कहा कि बाबा साहेब द्वारा निर्मित संविधान की शक्ति ने ही उन्हें महापौर की कुर्सी तक पहुंचने का अवसर प्रदान किया है। संविधान ने समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अधिकार, सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर दिया है। बाबा साहेब के विचार आज भी देश और समाज को नई दिशा दिखाने का कार्य कर रहे हैं।

सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है शिक्षा

कार्यक्रम का शुभारंभ अपर जिला जज बिजनौर सुंदरलाल, सतीश आजाद, सपा एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती, जाटव महासभा के अध्यक्ष सुदेश जाटव सहित अन्य अतिथियों ने भगवान बुद्ध और डॉ. अंबेडकर की प्रतिमाओं के समक्ष दीप प्रज्वलित कर तथा रिबन काटकर किया।

इस अवसर पर भंते धम्म सागर ने तथागत बुद्ध की वंदना करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा और शांति के संदेश को आगे बढ़ाया। उन्होंने मानवता के विकास और सामाजिक उत्थान के लिए शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना।

अपर जिला जज सुंदरलाल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक समानता, न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह शक्ति है, जिसके माध्यम से समाज में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है।

बाबा साहेब केवल व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक विचार हैं

सतीश आजाद ने कहा कि बाबा साहेब केवल एक महापुरुष नहीं, बल्कि एक ऐसी विचारधारा हैं, जो समाज को भेदभाव से मुक्त कर समानता के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने ऐसे भारत की कल्पना की थी, जहां किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी जाति या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो।

सपा एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, ज्ञान और दृढ़ संकल्प की अद्भुत मिसाल है। उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देते रहेंगे।

बाबा साहेब के गीतों से गूंज उठा सभागार

कार्यक्रम के दौरान मनजीत मेहरा और सविता अंबेडकर ने बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष और आदर्शों पर आधारित गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। गीतों के माध्यम से सामाजिक समानता और संविधान के महत्व का संदेश दिया गया। प्रस्तुतियों पर सभागार बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कार्यक्रम संयोजक पार्षद स्वराज सिंह और सह संयोजक नितिन जाटव ने अतिथियों को पगड़ी पहनाकर एवं अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर उपसभापति मयंक गर्ग, मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष दिग्विजय चौहान, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, पार्षद मनोज प्रजापति, संजीव कर्णवाल, पार्षद प्रतिनिधि नीरज दिवाकर, राकेश कल्याण और परविंद्र तोमर सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन रविप्रकाश बौद्ध और संजय जाटव ने संयुक्त रूप से किया।

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