यूपी में अब मीट की दुकानों पर सियासत! आमने सामने आए योगी के मंत्री संजय निषाद और सांसद इमरान मसूद
उत्तर प्रदेश वाराणसी नगर निगम द्वारा मांस-मछली की दुकानें शहर से बाहर भेजने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर यही इरादा है तो पूरे देश में मांस पर प्रतिबंध लगा दीजिए. देश की आबादी में मुसलमानों की संख्या 14% है और 82% लोग मांसाहारी हैं, तो अगर यही इरादा है तो इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दीजिए.”
जबकि प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने वाराणसी नगर निगम का बचाव करते हुए कहा,”यह दुकानें बंद नहीं हो रही हैं, बल्कि इन्हें व्यवस्थित किया जा रहा है. यह स्वास्थ्य की सुरक्षा का मामला है और नियमों का उद्देश्य अव्यवस्था को दूर करना.”
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल 7 जून को वाराणसी नगर निगम में प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें शहर के अंदर की मांस-मछली की दुकानें बाहर शिफ्ट करने के फैसला हुआ. यह निर्णय महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया. जिसके पीछे तर्क दिया गया कि शहर की पहचान धार्मिक नगरी के रूप में है. साथ ही शहर के भीतर साफ-सफाई भी बेहतर रहेगी. इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छह महीने की समय सीमा तय की गयी है.
400 दुकानों पर होगा असर
एक अनुमान के मुताबक शहर में 350 से 400 से अध्गिक मांस-मछली की दुकानें हैं, उनके कारोबार पर ख़ासा असर पड़ने की संभावना है. जबकि इस व्यापार से जुड़े लोगों ने इस फैसले को अव्यवहारिक बताया है. उनके मुताबिक ग्राहकों को इससे काफी दिक्कत होगी. साथ ही महंगा होने से व्यापार पर असर पड़ेगा.
प्रदेश में इस तरह की पहल करने वाला वाराणसी पहला शहर है, जिसका अब राजनीतिक स्तर पर विरोध होना भी शुरू हो चुका है. आरोप है कि लोगों के खान-पान को नियंत्रित करने का प्रयोग है. इसलिए इस फैसले को वापस लेना चाहिए. लेकिन नगर निगम ऐसा करेगा ये मुश्किल जान पड़ रहा है.
