वित्त मंत्री सीतारमण का विपक्ष पर वार, ‘बोझ कस्टमर पर नहीं’
UPI पर लगने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि इस शुल्क का बोझ UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. उनके मुताबिक MDR कोई टैक्स या सेस नहीं है, बल्कि पेमेंट सिस्टम से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच लगने वाला शुल्क है.
सरकार के नए फ्रेमवर्क के अनुसार, 2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं लगेगा. इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन भी राशि की परवाह किए बिना मुफ्त रहेगा. सरकार के अनुसार, छोटे व्यापारियों के लिए लागू जीरो-MDR व्यवस्था वाले भुगतान भी शुल्क से बाहर रहेंगे. सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों के कारण करीब 96 फीसदी P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी वाले UPI ट्रांजैक्शन पर नए MDR का असर नहीं पड़ेगा.
2,000 से ऊपर के भुगतान पर क्या होगा?
15 अक्टूबर 2026 से तय श्रेणी के 2,000 से अधिक के P2M UPI भुगतान पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा. 75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए इसकी अधिकतम सीमा 300 तय की गई है. कुछ विशेष क्षेत्रों, जैसे फ्यूल और रेलवे टिकट आदि के लिए अलग फ्लैट शुल्क का प्रावधान है. यह शुल्क ग्राहक से सीधे लेने के लिए नहीं है. वित्त मंत्री ने कहा है कि इसका बोझ पेमेंट सिस्टम के भीतर संबंधित सर्विस प्रोवाइडर्स और दूसरे हिस्सेदारों के बीच रहेगा.
