यूपी चुनाव से पहले मायावती का ‘Gen-Z’ पर दांव, बेरोजगारी और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरा
लखनऊ। विधान सभा चुनाव के लिए सोशल इंजीनियरिंग का ताना-बाना बुन रही मायावती ने अब जेन-जी को अपने राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में लाने की कोशिश की है।
जंतर-मंतर पर बेरोजगारी को लेकर हुए युवा आंदोलन का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र व राज्य सरकारों से तत्काल पेपर लीक व भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती शुरू करने की मांग की है।
बसपा प्रमुख ने सोमवार को एक्स पर पोस्ट कर ‘हर हाथ को काम’ की मांग को सामाजिक न्याय से भी जोड़ा है, कहा है कि एक परिवार के एक सदस्य को भी सरकारी नौकरी मिलने से पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती है।
सरकारी भर्तियों में एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण का लाभ मिलने से इन वर्गों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है। साफ है कि जेन-जी को लेकर भाजपा, सपा, कांग्रेस की सक्रियता के बीच बसपा भी पीछे नहीं रहना चाहती है।
नीट पेपर लीक को लेकर पिछले दिनों दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर सपा और कांग्रेस, सरकार पर हमलावर हैं। जबकि पूर्व में बसपा प्रमुख ने राजनीतिक दलों को मुद्दे पर राजनीति न करने की नसीहत के साथ सधी हुई प्रतिक्रियाएं ही दी थीं।
ऐसे में मायावती का इस मुद्दे पर मुखर होना विपक्षी राजनीति में बसपा की अलग जगह बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बसपा प्रमुख ने सोमवार को एक्स पर लिखा कि बसपा ने अपने शासनकाल में सवा दो लाख सरकारी नौकरियां दी थीं।
अब कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से शिक्षित युवाओं ने जंतर-मंतर के आंदोलन के जरिये इन मुद्दों को गंभीर चर्चा का मुद्दा बना दिया है, इसे लेकर देश के शिक्षा मंत्री को भी अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। बसपा प्रमुख ने मांग की है कि केंद्र व राज्य सरकारें राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचना बंद करें और भर्तियां कराएं।
इससे एससी, एसटी व ओबीसी समाज को भी वह सुरक्षा मिल पाएगी, जो आरक्षण को निष्प्रभावी व निष्क्रिय करने के कारण नहीं मिल रही है। बसपा प्रमुख ने संसद के वर्तमान सत्र में जारी गतिरोध को भी समाप्त करने की मांग की है।
मायावती की कोशिश युवाओं के मुद्दे को अपने पारंपरिक दलित आधार से जोड़ने की है, परंतु ये इस पर निर्भर है कि वह अपने संगठन और राजनीतिक संदेश को युवाओं तक कितने प्रभावी ढंग से पहुंचा पाती हैं।
