जासूसों के लिए और कौन कर रहा था ‘जासूसी’, पता लगाने में जुटीं एजेंसियां

 

 

  • जासूसी के आरोपी पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी वापस पाक भेजे गए
  • जासूसी करते रंगे हाथ पकड़े गए थे आबिद हुसैन और मोहम्मद ताहिर
  • भारत में इनकी मदद कौन कर रहा था, सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं जांच
  • सूत्रों ने बताया कि ISI दोनों को हर महीने पर टास्क पूरा होने पर लिस्ट देती थी

नई दिल्ली
जासूसी के आरोप में पकड़े गए पाकिस्तानी उच्चायोग (Pakistan High Commission) के दो कर्मचारियों आबिद हुसैन (Abid Hussain) और मोहम्मद ताहिर (Muhammad Tahir) को जासूसी के आरोप में भारत ने भले ही पाकिस्तान भेज दिया हो, लेकिन उनकी करतूतों का किया धरा यहां सुरक्षा एजेंसियां खोजने में जुटी हैं। पाकिस्तानी जासूसों के आधार कार्ड बनवाने, सिम मुहैया कराने, संपर्क में रहे रेलवे के कर्मचारी और सेना के जवानों की जानकारियां जुटाई जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि आईएसआई हर महीने-दो महीने पर टास्क पूरा होने पर लिस्ट देती थी। उसी के हिसाब से ये अगला टारगेट चुनते थे। कोड डिकोड करने के लिए टीम इनके संपर्कों का पता लगा रही है। फिलहाल सेल और सुरक्षा एजेंसियां पता लगा रही हैं कि आबिद ने गीता कॉलोनी का नासिर गौतम नाम से आधार कार्ड कहां से बनवाया था।

स्पेलिंग बनी शक की वजह

गौतम की स्पेलिंग सही नहीं थी। आधार कार्ड पर गौतम की जगह गोतम लिखा हुआ था। इस पर सुरक्षा एजेंसियों को शक हुआ। पूछताछ में दोनों ने कबूला कि वे पाकिस्तानी नागरिक हैं और दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात हैं। शेखपुरा, पंजाब, पाकिस्तान निवासी 42 साल का आबिद हुसैन और इस्लामाबाद निवासी 44 साल का मोहम्मद ताहिर वीजा अधिकारी के रूप में सात साल से काम कर रहे थे। वहीं 36 साल का जावेद हुसैन भी पाकिस्तान के भक्कर का निवासी है और उन दोनों के लिए ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था।

 
 

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