वीआईपी गैंग… रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 150 बेरोजगारों से 10 करोड़ की ठगी

 

वीआईपी बनकर बेरोजगार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। इस वीआईपी गैंग के बदमाश सत्ताधारी नेताओं के कार्यक्रम आयोजित कर उनकी वीडियो बनाते और फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में अस्थायी कार्यालय खोलकर रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करते रहे। दो आरोपी दबोचे गए हैं, जिन्होंने अभी तक 150 बेरोजगार युवकों से ठगी की बात कबूली है।

मेरठ में कंकरखेड़ा निवासी गोविंदा सिंह सेना से रिटायर्ड हैं। उनका बेटा सरकारी नौकरी की तलाश में है और दोस्तों के साथ कोचिंग सेंटर में तैयारी कर रहा है। सेंटर पर उसकी मुलाकात कंकरखेड़ा के दो लोगों से हुई। उन्होंने खुद को भाजपा के बड़े नेता के करीबी अरुण पासवान के बेटे मनोज पासवान से दोस्ती होनी बताई। अरुण पासवान भारतीय रेलवे माल गोदाम श्रमिक संघ के महासचिव बताए गए। लखनऊ में ही भाजपा नेता और उत्तर रेलवे के अधिकारियों के साथ कार्यक्रम होने बताए। सत्ताधारी नेताओं के साथ कार्यक्रम की वीडियो दिखाई। अभी तक की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर प्रति व्यक्ति से साढे़ छह लाख रुपये के हिसाब से 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की जा चुकी है।

 
 

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