अखिल भारतीय त्रिदिवसीय संत एवं ज्योतिष विद्वान समारोह में 822 विद्वानों का भव्य सम्मान
- सहारनपुर में आयोजित अखिल भारतीय त्रिदिवसीय संत एवं ज्योतिष विद्वान समारोह का मंचीय दृश्य।
सहारनपुर। ओम शांति रिट्रीट सेंटर में आयोजित त्रिदिवसीय संत सम्मान, ज्योतिष विद्वान एवं महामंडलेश्वर सुशोभन समारोह में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने कहा कि परमात्मा असंख्य सूर्यों के समान हैं तथा आत्मा ज्योति बिंदु स्वरूप है, इसलिए देह अभिमान त्यागकर आत्मिक जीवन अपनाना चाहिए। ओम शांति रिट्रीट सेंटर में आयोजित त्रिदिवसीय संत सम्मान, ज्योतिष विद्वान एवं महामंडलेश्वर सुशोभन समारोह मेका शुभारंभ शंखध्वनि व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन ब्रह्माकुमारी आशा दीदी, वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका ब्रह्माकुमारी उषा बहन, धार्मिक प्रभाग प्रयागराज की अध्यक्ष ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी, ब्रह्माकुमारी सपना दीदी, ब्रह्माकुमारी वीना दीदी, डॉ. पुष्पा पांडे, प्रो. शिवराम गंगोपाध्याय, ब्रह्माकुमारी लक्ष्मी दीदी, इंदौर जोन संयोजक नारायण भाई तथा दिव्य शक्ति अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर संत कमल किशोर महाराज सहित अन्य संतों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने कहा कि परमात्मा असंख्य सूर्यों के समान हैं तथा आत्मा ज्योति बिंदु स्वरूप है, इसलिए देह अभिमान त्यागकर आत्मिक जीवन अपनाना चाहिए। ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी ने कहा कि ज्ञान का सूक्ष्म अहंकार भी विनाशकारी होता है और अहंकार प्रेम व आनंद के मार्ग में बाधा बनता है। वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका उषा बहन ने राजयोग को आत्मा-परमात्मा के मिलन का श्रेष्ठ साधन बताते हुए इसे जीवन में शांति व शक्ति प्राप्ति का सरल मार्ग बताया।
डॉ. पुष्पा पांडे ने श्रीमद्भागवत गीता के माध्यम से समभाव व स्थिर बुद्धि का संदेश दिया। दिव्य शक्ति अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर संत कमल किशोर जी महाराज ने कहा कि यश-अपयश, मान-सम्मान और सुख-दुख में समान रहने वाला ही सच्चा संत होता है।
