श्रीभागवत पुराण की स्थापना के साथ ही सभी देवी देवता विराजमान हो जाते है- भगवती प्रसाद शुक्ल
नकुड 1 जून इंद्रेश। कथा वाचक आचार्य भगवती प्रसाद शुक्ल ने कहा है कि भागवत पवित्र ग्रंथ है। यह जंहा स्थापित हो जाता है सारे तिरथ व देवीदेवता वंहा विराजमान हो जाते हैं ।
यंहा राधेगोविंद सेवासमिति द्वारा आयोजित भागवत कथा के पहले दिन ंश्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए आचार्य भगवती प्रसाद ने कहा कि पूतना भगवान को मारने के लिये आयी थी। पंरतु श्री भगवान ने उसे भी मां का दर्जा दिया। भगवान के प्रति पूर्ण समपर्ण ही ईश्वर भक्ति है। कहा कि भगवान तो भाव के भूखे हैं । भक्त अपने समर्पण से उन्हे भी अपने वश मे कर सकता हैं ।
इस मौके पर भागवत प्रवक्ता आचार्य मिथिलेश नंदन कौशिक को समिति ने भागवत रत्न से सम्मानित किया। यह उपाधि उन्हे व्यास पीठ से आर्चाय भगवती प्रसाद शुक्ल ने दी है। इससे पूर्व कथा का शुभारंभ पूजा अर्चना के साथ हुआ । पहले दिन विनित शर्मा ने पूजन किया। कथा के समय समिति के सभी पदाधिकारी व सैकडो श्रोता उपस्थित रहे।
