शाकुंभरी विश्वविद्यालय की अनूठी पहल: अब विद्यार्थी बेझिझक साझा कर सकेंगे अपनी चिंताएं

शाकुंभरी विश्वविद्यालय की अनूठी पहल: अब विद्यार्थी बेझिझक साझा कर सकेंगे अपनी चिंताएं
मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय में ‘ड्रॉप योर वरी’ अभियान के तहत मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाते शिक्षक एवं विद्यार्थी।

‘ड्रॉप योर वरी’ अभियान से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल, गोपनीय तरीके से मिलेगा विशेषज्ञों का परामर्श

सहारनपुर, 16 अक्टूबर। मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ साइकोलॉजी की ओर से मानसिक स्वास्थ्य माह के अंतर्गत ‘ड्रॉप योर वरी’ अभियान शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को तनाव, चिंता और भावनात्मक समस्याओं को बिना किसी संकोच के साझा करने के लिए सुरक्षित एवं सहयोगपूर्ण मंच उपलब्ध कराना है।

कुलपति प्रो. वाई. विमला के निर्देश और शैक्षणिक समन्वयक प्रो. विनोद कुमार के संरक्षण में शुरू किए गए इस अभियान के तहत विद्यार्थी पर्ची पर अपनी परेशानियां लिखकर साझा कर सकेंगे। विश्वविद्यालय की ओर से उनकी ओर से साझा की गई जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि विद्यार्थी बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं सामने रख सकें।

पर्ची के जरिए साझा कर सकेंगे मन की बात

अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों को अपनी चिंताएं, परेशानियां और भावनात्मक समस्याएं पर्ची पर लिखने का अवसर दिया जा रहा है। जो विद्यार्थी विशेषज्ञों से व्यक्तिगत परामर्श लेना चाहते हैं, वे पर्ची पर अपना नाम और संपर्क नंबर भी लिख सकते हैं। इसके माध्यम से जरूरतमंद विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

विश्वविद्यालय की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना है कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। पढ़ाई, परीक्षाओं, भविष्य की चिंता और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण विद्यार्थियों को कई बार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अपनी परेशानी साझा करना और समय पर उचित परामर्श प्राप्त करना उनके लिए मददगार साबित हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर जोर

‘ड्रॉप योर वरी’ अभियान के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जहां विद्यार्थी अपनी भावनाओं और समस्याओं को लेकर खुलकर बात कर सकें। पहल के जरिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकोच को दूर करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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