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जम्मू कश्मीर की मतदाता सूची का पूरा विवाद और सियासत, अनुच्छेद 370 के खत्म होने के साथ यूं बदल गए नियम

  • August 25, 2022
जम्मू कश्मीर की मतदाता सूची का पूरा विवाद और सियासत, अनुच्छेद 370 के खत्म होने के साथ यूं बदल गए नियम
  • जम्मू कश्मीर में अंतिम बार मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण 2019 में हुआ था। उस समय जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव में 78 लाख 44 हजार 343 मतदाता पंजीकृत हुए थे। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के लिए 7316946 मतदाता पंजीकृत थे।

जम्मू। जम्मू-कश्मीर की सियासत (Jammu Kashmir Politics) खूब गर्माई हुई है। जम्मू कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदयेश कुमार ने 17 अगस्त को एलान किया था कि जम्मू कश्मीर में रहने वाला प्रत्येक नागरिक नियमों के आधार पर जम्मू कश्मीर में बतौर मतदाता अपना पंजीकरण करा कर सकता है और मतदान कर सकता है। इससे पूर्व अनुच्छेद 370 (Article 370) के रहते हुए सिर्फ जम्मू कश्मीर के स्थायी नागरिकों (स्टेट सब्जेक्ट) को विधानसभा चुनाव (Jammu Kashmir Election) में मतदान का अधिकार था। लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में प्रदेश में रह रहे अन्य राज्यों के नागरिक भी मतदान कर सकते थे। जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के बाद यहां भी देश के अन्य राज्यों की तरह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 लागू हो गया है और इसी के तहत यहां चुनाव होंगे। इसके मुताबिक, देश का 18 वर्ष से अधिक आयु का प्रत्येक नागरिक जहां भी वह रह रहा हो, खुद को मतदाता के रूप में पंजीकृत करा सकता है और मतदान में हिस्सा ले सकता है। कश्मीर के दलों को आशंका सता रही है अन्य राज्यों के मतदाताओं के सूची में शामिल होने से उनका चुनावी गणित गड़बड़ा सकता है। इसीलिए वह इसे स्थानीय बनाम बाहरी का रंग दे रहे हैं।

अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद क्या आया बदलाव?

अनुच्छेद 370 के बाद अब यहां भी अन्य राज्यों की तरह विधानसभा व लोकसभा चुनाव के लिए एक ही मतदाता सूची होगी। इससे पहले दोनों के लिए अलग-अलग मतदाता सूचियां बनती थीं।

जम्मू कश्मीर में मतदाता सूचियों की मौजूदा स्थिति है क्या

जम्मू कश्मीर में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, समीक्षा और संशोधन की प्रक्रिया जारी है। 1 अक्टूबर 2022 तक 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाला कोई भी नागरिक बतौर मतदाता पंजीकरण करा सकता है। मसौदा मतदाता सूचियों का प्रकाशन 15 सितंबर तक होगा और मतदाता सूची को लेकर किसी भी तरह की आपत्तियां और दावों को 25 अक्टूबर तक दायर किया जा सकता है। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 25 नवंबर को होगा।

कब होगा विधानसभा चुनाव

जम्मू कश्मीर में अंतिम विधानसभा चुनाव नवंबर 2014 में हुआ था। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत जम्मू कश्मीर में विधानसभा के गठन से पूर्व परिसीमन किया जाना था। परिसीमन की प्रक्रिया इस वर्ष मई में संपन्न हुई और अब मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण जारी है। विधानसभा चुनाव पर अंतिम निर्णय मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद जम्मू कश्मीर के सुरक्षा परिदृश्य के आकलन के आधार पर ही लिया जाएगा।

किन-किन लोगों को माना जाएगा ‘सामान्य निवासी’

संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का पंजीकरण अधिकारी ही तय करेगा कि कौन इस क्षेत्र में ‘सामान्य निवासी’ है। वह नागरिक जो देश के किसी भी राज्य के मूल निवासी हों, लेकिन रोजगार, शिक्षा या किसी अन्य कारण से जम्मू कश्मीर में रह रहे हैं, उन्हें यहां किसी निर्वाचन क्षेत्र में बतौर मतदाता पंजीकृत किया जा सकता है। हां, यह स्पष्ट है कि कोई भी नागरिक दो निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत नहीं हो सकता।

जम्मू कश्मीर में किन्हें माना जाता है अस्थायी निवासी

अनुच्छेद 370 के चलते जम्मू कश्मीर में रह रहे अन्य राज्यों के नागरिक लोकसभा चुनाव में ही मतदान कर सकते थे। ऐसे मतदाताओं को एनपीआर (अस्थायी निवासी) कहा जाता है। गुलाम जम्मू कश्मीर के विस्थापित विधानसभा और संसदीय चुनाव में मताधिकार का प्रयोग कर सकते थे, जबकि जम्मू कश्मीर में 1947 से रह रहे पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी सिर्फ संसदीय चुनाव में ही वोट डाल सकते थे। उन्हें एनपीआर के तौर पर खुद को पंजीकृत कराना होता था।

जम्मू कश्मीर में क्यों बढ़ रहे हैं मतदाता?

जम्मू कश्मीर में अंतिम बार मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण 2019 में हुआ था। उस समय जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव में 78 लाख 44 हजार 343 मतदाता पंजीकृत हुए थे। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के लिए 7316946 मतदाता पंजीकृत थे। वर्ष 2019 में जम्मू कश्मीर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1957 प्रभावहीन होने के बाद से मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण नहीं हुआ है। सरकारी अनुमान के मुताबिक अब तक जम्मू कश्मीर में लगभग एक करोड़ आबादी 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की हो चुकी है।

अभी क्या है स्थिति

  • जम्मू नगर निगम के कुल वार्ड 75
  • रिक्त वार्ड : दो (दो कारपोरेटर के निधन के कारण रिक्त)
  • स्नातक या अधिक 29
  • 12वीं पास 15
  • 10वीं पास 12
  • आठवीं पास 19

जम्मू नगर निगम के मेयर चंद्रमोहन गुप्ता ने बताया कि फिलहाल चुनाव लड़ने के लिए कोई शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं है। सरकार ही इस पर अंतिम फैसला ले सकती है। कोशिश कर रहे हैं कि अच्छे प्रस्ताव पारित हों जिनसे लोगों का भविष्य संवर सके।

 

 

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