CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर RJD का हमला, प्रियंका भारती बोलीं- तिरंगे से इतना डर क्यों रही सरकार?
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। RJD की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने पूछा कि आखिर दोनों नेताओं को किस अपराध के लिए जेल भेजा गया है? क्या जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना अपराध है?
प्रियंका भारती ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि दिल्ली भारत का ही हिस्सा है और यहां तिरंगा फहराने को लेकर इस तरह की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने CJP नेताओं की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए सरकार पर निशाना साधा।
‘बीजेपी को तिरंगे से डर क्यों लग रहा है?’
RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पर वर्ष 2001 में तिरंगा फहराने से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी तिरंगा फहराने के मामले में तीन युवाओं को जेल भेजा गया था।
प्रियंका भारती ने सवाल उठाया कि सरकार तिरंगे से इतना क्यों डर रही है? उन्होंने बीजेपी और RSS को निशाने पर लेते हुए कहा कि जिस तरह छात्रों के साथ कथित तौर पर सख्ती की जा रही है और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा रहा है, वह निंदनीय है।
सोशल मीडिया पर भी उठाए सवाल
प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी इस मामले को लेकर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ”RSS हेडक्वार्टर पर तिरंगा फहराने पर जेल भेजने वाले अब जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने पर जेल भेज रहे हैं। क्या बदला?”
उन्होंने अपनी पोस्ट में आशुतोष रांका और सौरव दास को टैग करते हुए उनकी हिरासत की कड़ी निंदा की। इस बयान के बाद CJP नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर विपक्षी दलों की ओर से केंद्र सरकार पर हमले और तेज हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, CJP के तीन सदस्यों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि उन्होंने बैरिकेडिंग पार कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की।
पुलिस ने उनके खिलाफ अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा के उल्लंघन और शांति बनाए रखने के लिए भरे गए मुचलकों की शर्तों के उल्लंघन सहित विभिन्न आरोपों में मामला दर्ज किया। इसके बाद 14 अक्टूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि तीसरे सदस्य अजिंक्य शिंदे को सशर्त रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई।
इस कार्रवाई के बाद अरविंद केजरीवाल, आतिशी और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। अब RJD के विरोध के बाद यह मामला और तूल पकड़ता दिख रहा है।
