ईरान और अमेरिका डील में सबसे ऊपर पाकिस्तान का नाम तो खुशी से फूले नहीं समाए शहबाज शरीफ, कहा- ‘मेरी मध्यस्थता में…’
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं. डील होने पर पाकिस्तान भी मध्यस्थता का क्रेडिट लेकर अपनी वाहवाही करने में जुटा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी प्रेसिडेंट मसूद पेजेश्कियान के समझौते पर डिजिटली साइन करने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का पहला बयान सामने आया है.
‘मैंने मध्यस्थ के रूप में दी मंजूरी’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि आज अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (MoU) पर डिजिटल हस्ताक्षर किए गए हैं. इस समझौते पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने हस्ताक्षर किए हैं और मध्यस्थ के रूप में मैंने भी इस पर अपनी मंजूरी दी है. दोनों सरकारों के सबसे बड़े स्तर पर इस समझौते का होना यह दिखाता है कि दोनों पक्ष विवाद को बातचीत से सुलझाने के लिए कितने गंभीर हैं.’
ट्रंप की तारीफ में शहबाज ने पढ़े कसीदे
पाक पीएम ने आगे कहा, ‘इस्लामाबाद समझौता’ तुरंत लागू हो जाएगा. इसके पहले कदम के रूप में ईरान तुरंत ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ को दोबारा खोल देगा और अमेरिका तुरंत अपनी समुद्री नाकेबंदी हटा लेगा. मैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प को बधाई और धन्यवाद देता हूं, जिनकी बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान की जिद ने एक बार फिर ऐसे विवाद को खत्म कर दिया जो पूरे इलाके के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था. मैं अमेरिकी बातचीत टीम (जिसमें जे.डी. वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं) की मेहनत और लगातार प्रयासों की भी तारीफ करता हूं.’
ईरान को लेकर क्या कहा?
शहबाज शरीफ ने कहा, ‘मैं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोज्तबा हुसैनी खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के प्रति सम्मान और आभार जताता हूं, जिन्होंने शांति के रास्ते को चुना. मैं ईरान की बातचीत टीम (जिसमें मोहम्मद बागेर गालिबाफ, अब्बास अराक्ची और एस्कंदर मोमेनी शामिल हैं) के सब्र और कोशिशों की भी सराहना करता हूं, जिनकी वजह से यह समझौता मुमकिन हो पाया.’
आसिम मुनीर को दिया डील कराने का क्रेडिट
‘मैं इस मोड़ तक पहुंचने में कतर देश के नेतृत्व के सच्चे और अच्छे प्रयासों की खास तौर पर तारीफ करता हूं. इसके साथ ही, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के नेतृत्व को भी इस काम में उनके जरूरी योगदान के लिए धन्यवाद देता हूं. मैं फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का भी खासतौर से जिक्र करना चाहूंगा, जिनकी कड़ी मेहनत और अहम भूमिका इस बड़ी कामयाबी को हासिल करने और क्षेत्र में शांति व स्थिरता लाने के लिए बहुत जरूरी थी. उम्मीद है कि यह समझौता पूरे क्षेत्र में आपसी सम्मान, बेहतर समझ और खुशहाली की एक मजबूत नींव बनेगा.’
