NEET-UG पेपर लीक केस: आज कोर्ट में अहम सुनवाई, ट्रायल शुरू होने की दिशा में बढ़ सकता है मामला

NEET-UG पेपर लीक केस: आज कोर्ट में अहम सुनवाई, ट्रायल शुरू होने की दिशा में बढ़ सकता है मामला

नई दिल्ली : NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में शुक्रवार को राउज एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। अदालत यह तय करेगी कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। यदि अदालत संज्ञान लेती है तो मामले में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो सकता है।

इससे पहले गुरुवार को विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने मामले के सभी 13 आरोपितों की न्यायिक हिरासत 10 अगस्त तक बढ़ा दी थी। वहीं, आरोपित विकास बिवाल और दिनेश बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 18 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई है।

आरोपपत्र की जांच पूरी, अब संज्ञान पर फैसला

अदालत ने बताया कि CBI द्वारा दाखिल आरोपपत्र और उससे जुड़े दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है। अब 7 अगस्त को अदालत यह निर्णय करेगी कि मामले में औपचारिक रूप से संज्ञान लिया जाए या नहीं। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि उन्हें आरोपपत्र की सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध करा दी गई है।

हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि आरोपपत्र लगभग 20 हजार पन्नों का है, इसलिए दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है, ताकि जमानत याचिकाओं पर प्रभावी ढंग से पक्ष रखा जा सके।

हार्ड कॉपी की मांग, जांच के लिए तैयार आरोपित

आरोपितों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह ने अदालत में दलील दी कि इतने बड़े दस्तावेज केवल पेन ड्राइव के माध्यम से उपलब्ध कराए गए हैं। न्यायिक हिरासत में रहते हुए इन दस्तावेजों का अध्ययन करना व्यावहारिक रूप से कठिन है, इसलिए आरोपपत्र की हार्ड कॉपी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सभी आरोपित अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए स्वेच्छा से पॉलीग्राफ, लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने को तैयार हैं। अदालत ने इस मांग पर 10 अगस्त को फैसला सुनाने की बात कही है।

CBI ने किया विरोध

CBI ने बचाव पक्ष की इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है। एजेंसी का तर्क था कि मामले की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है, इसलिए इस प्रकार की याचिकाएं सुनवाई में अनावश्यक देरी पैदा कर सकती हैं। CBI ने यहां तक कहा कि ऐसे आवेदनों पर जुर्माना लगाने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

CBI के आरोपपत्र में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है, जो मामले की व्यापकता को दर्शाते हैं।

वकीलों की देरी पर कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों के निर्धारित समय पर अदालत नहीं पहुंचने पर न्यायाधीश अजय गुप्ता ने नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में हर मिनट महत्वपूर्ण है और सभी पक्षकारों को सुबह 10 बजे समय पर अदालत में उपस्थित होना चाहिए।

जज ने कहा कि मामले के शीघ्र निस्तारण के लिए समयबद्ध सुनवाई जरूरी है और भविष्य में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गौरतलब है कि यह मामला पहले राउज एवेन्यू कोर्ट में ही चल रहा था। बाद में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के बाद इसकी सुनवाई विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा को सौंपी गई थी। उनके स्थानांतरण के बाद अब न्यायाधीश अजय गुप्ता इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

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