आगरा छावनी में 17 सड़कों के बदले जाएंगे नाम, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बीजेपी को घेरा

आगरा छावनी में 17 सड़कों के बदले जाएंगे नाम, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बीजेपी को घेरा
सांसद चंद्रशेखर आजाद

आगरा में 17 सड़कों के नाम बदलने के प्रस्ताव पर छावनी बोर्ड की मुहर लग गई है, कैंटोनमेंट के इस निर्णय पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संस्थापक व उत्तर प्रदेश स्थित नगीना लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने छावनी बोर्ड के इस निर्णय पर सवाल खडे़ किए हैं,  साथ ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधा है.

नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने एक्स पर लिखा, “आगरा छावनी में 17 सड़कों के नाम बदलने का निर्णय लिया गया है. जिस बैठक में यह फैसला लिया गया, उसमें भाजपा नेताओं की उपस्थिति भी रही. लेकिन यह निर्णय कई गंभीर सवाल खड़े करता है. यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की अनदेखी का मामला बन गया है.”

‘महिला समाज सुधारकों और वीरांगनाओं की अनदेखी चिंता जनक’

उन्होंने कहा कि, “सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पूरी सूची में एक भी सड़क का नाम किसी महिला के नाम पर नहीं रखा गया, जबकि हमारे देश में ऐसी महान वीरांगनाएं और समाज सुधारक रही हैं, जिन्होंने इतिहास रचा है. उदाहरण के तौर पर सावित्रीबाई फुले जी,फातिमा शेख जी,  अहिल्याबाई होल्कर जी, अवंतिका बाई लोधी जी, झलकारी बाई जी, उदा देवी पासी जी, फूलन देवी जी जैसी महान हस्तियों की अनदेखी करना अत्यंत चिंताजनक है.”

अल्पसंख्यक महापुरुषों की उपेक्षा स्पष्ट दिखाई दी- चंद्रशेखर आजाद

चंद्रशेखर आजाद ने कहा है कि, “सिर्फ महिलाओं ही नहीं, बल्कि एससी/एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज के महापुरुषों की भी इस सूची में उपेक्षा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. क्या अशफाक उल्लाह खान, हेमू कालाणी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे राष्ट्रनिर्माता इस सम्मान के योग्य नहीं हैं?”

फैसले ने बीजेपी के दावों को किया उजागर- चंद्रशेखर आजाद

नगीना सांसद ने कहा कि है कि, “एक तरफ सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (जो बिना समान और न्यायसंगत हिस्सेदारी के हैं) की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसे निर्णयों में महिलाओं और वंचित वर्गों को स्थान नहीं दिया जाता-यह एक स्पष्ट विरोधाभास है.” उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं की मौजूदगी में लिया गया यह फैसला भाजपा के “नारी सम्मान” और “सामाजिक न्याय” के दावों की असलियत उजागर करता है-ये दावे सिर्फ दिखावे तक सीमित हैं.

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