महिला आरक्षण-परिसीमन पर चर्चा-समर्थन की मांग, किरेन रिजिजू ने लिखा खरगे को पत्र

महिला आरक्षण-परिसीमन पर चर्चा-समर्थन की मांग, किरेन रिजिजू ने लिखा खरगे को पत्र

पीएम मोदी को खरगे के पत्र का दिया जवाब, संसद के सत्रावसान में देरी पर भी रखी सरकार की बात

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा करने और समर्थन देने की अपील की है। यह पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खरगे की ओर से लिखे गए पत्र के जवाब में भेजा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने इससे पहले परिसीमन संशोधन विधेयक को संसद में विचार के लिए लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।

किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों पर सभी राजनीतिक दलों के साथ सार्थक चर्चा और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस से रचनात्मक सहयोग करने और भविष्य में पेश किए जाने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों पर सकारात्मक चर्चा में हिस्सा लेने का आग्रह किया।

पीएम मोदी को लिखे पत्र के जवाब में रिजिजू का पत्र

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर खरगे को पत्र लिखे जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से लिखे गए पत्र के जवाब में है।

रिजिजू के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन संशोधन विधेयक को संसद में विचार के लिए लाए जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से विपक्ष के साथ चर्चा की गई है और इस विषय पर पत्राचार भी हुआ है।

उन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी विपक्ष के सहयोग की अपेक्षा जताई।

संसद के सत्रावसान में देरी पर क्या कहा?

अपने पत्र में किरेन रिजिजू ने संसद का सत्रावसान नहीं किए जाने को लेकर उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने 13 अगस्त 2026 को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और उसके बाद 64 दिन बीतने तक सत्रावसान नहीं होने के मुद्दे का उल्लेख किया।

रिजिजू ने कहा कि संविधान में ऐसी कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं है, जिसके तहत सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद एक तय अवधि के भीतर सत्रावसान करना अनिवार्य हो। ऐसे में केवल सत्रावसान नहीं होने के आधार पर किसी संवैधानिक अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

पुराने संसदीय उदाहरणों का भी दिया हवाला

केंद्रीय मंत्री ने अपने तर्क के समर्थन में संसद के पिछले कार्यकालों के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि अतीत में कई बार संसद की बैठकों के बीच लंबा अंतराल रहा है।

रिजिजू के पत्र के मुताबिक, वर्ष 2009 में लोकसभा 21 और 22 जुलाई को प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बैठी थी। इसके बाद सदन की बैठक 17 अक्टूबर को हुई और 24 अक्टूबर को स्थगित हुई। अगली बैठक 10 दिसंबर को आयोजित की गई।

इसके अलावा उन्होंने वर्ष 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 और 2013 में 49-49 दिन तथा 1963 में 41 दिन के अंतराल का भी उल्लेख किया।

विपक्ष से रचनात्मक सहयोग की अपील

किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार सार्थक चर्चा और सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर सकारात्मक रुख अपनाए और महत्वपूर्ण विधायी प्रक्रियाओं में रचनात्मक सहयोग करे।

इस पत्र के जरिए सरकार ने विपक्ष के साथ चर्चा की अपनी मंशा दोहराई है। वहीं, कांग्रेस की ओर से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग के बीच महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा तेज होने के संकेत हैं।

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