चीन के मुद्दे पर खरगे ने PM मोदी से पूछे 3 बड़े सवाल, कहा- देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा?

चीन के मुद्दे पर खरगे ने PM मोदी से पूछे 3 बड़े सवाल, कहा- देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा?

अरुणाचल में PLA के साथ टकराव, चीन से बढ़ते व्यापार घाटे और कूटनीतिक वार्ताओं के नतीजों पर कांग्रेस अध्यक्ष ने मांगा जवाब

नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चीन के साथ भारत के संबंधों और सीमा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार की चीन नीति पर स्पष्टता मांगी है। खरगे ने राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन पर बढ़ती आर्थिक निर्भरता और राजनयिक प्रयासों के नतीजों को लेकर प्रधानमंत्री से तीन प्रमुख सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष पर हमला करने के बजाय प्रधानमंत्री को संसद और पूरे देश को विश्वास में लेना चाहिए।

पहला सवाल: अरुणाचल में PLA के साथ टकराव क्यों जारी?

खरगे ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक के बयान का हवाला देते हुए अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ लगातार आमना-सामना होने पर चिंता जताई।

उन्होंने सवाल किया कि डोकलाम और गलवान के बाद क्या एक और गंभीर टकराव की स्थिति बन रही है? खरगे के मुताबिक, अगस्त में तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं। इसके बावजूद वाचा-दमाई में हुई कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी टकराव जारी रहने की बात सामने आ रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा कि क्या चीन के साथ तनाव के कारण भारतीय सैनिकों की गश्त की पहुंच प्रभावित हुई है? उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और देश को सीमा पर वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलनी चाहिए।

दूसरा सवाल: क्या मेक इन इंडिया अब इंपोर्ट फ्रॉम चाइना बन गया?

कांग्रेस अध्यक्ष ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भी मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2020 में गलवान घाटी में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद से चीन से होने वाले आयात में 102 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

खरगे के अनुसार, इस अवधि में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 155 प्रतिशत बढ़कर 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि चीन भारतीय निर्यात में बाधाएं डालता है। इसके बावजूद केंद्र सरकार चीनी निवेश पर लागू प्रतिबंधों में ढील दे रही है और चीन से जुड़ी पात्र कंपनियों को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का लाभ देने पर विचार कर रही है।

खरगे ने सवाल उठाया कि क्या सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ योजना अब ‘इंपोर्ट फ्रॉम चाइना’ में बदल गई है?

तीसरा सवाल: मोदी-शी की मुलाकातों और 25 दौर की वार्ता से क्या हासिल हुआ?

खरगे ने चीन के साथ भारत के कूटनीतिक प्रयासों के परिणामों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 मुलाकातें और बातचीत हो चुकी हैं।

इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भागीदारी वाली विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25 दौर की वार्ताएं और परामर्श एवं समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) की 36 बैठकें हो चुकी हैं। दोनों देशों के नेता SCO और BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी लगातार मिलते रहे हैं।

खरगे ने पूछा कि इतनी बैठकों और बातचीत के बावजूद भारत को ठोस रूप से क्या हासिल हुआ? क्या मई 2020 से पहले भारतीय सैनिकों को प्राप्त गश्त के अधिकार पूरी तरह बहाल हो गए हैं?

‘देश को चाहिए जवाबदेही, गले मिलने वाली कूटनीति नहीं’

कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्हें भारतीय सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जवाबदेही चाहिए, न कि केवल तस्वीरें खिंचवाने के अवसर या गले मिलने वाली कूटनीति।

खरगे ने मांग की कि प्रधानमंत्री विपक्ष पर राजनीतिक हमले करने के बजाय चीन के साथ सीमा विवाद, आर्थिक संबंधों और कूटनीतिक वार्ताओं की वास्तविक स्थिति को लेकर संसद तथा देश की जनता को विश्वास में लें।

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