JPC को भेजा जाएगा FCRA संशोधन विधेयक, विपक्ष के विरोध के बीच सरकार का बड़ा फैसला
नई दिल्ली : विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने व्यापक चर्चा और विभिन्न पक्षों की राय लेने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। इससे पहले राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने विधेयक को वापस लेने की मांग की थी।
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों और कई ईसाई संगठनों ने लगातार आपत्ति जताई है। तमिलनाडु विधानसभा ने भी बुधवार को इस विधेयक के विरोध में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इसे वापस लेने का आग्रह किया।
तमिलनाडु विधानसभा में पारित हुआ प्रस्ताव
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, विधानसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि प्रस्तावित संशोधन परमार्थ और सामाजिक सेवा से जुड़े संगठनों की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकते हैं। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक और समाज कल्याण संस्थानों के कामकाज पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई गई। चर्चा के बाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई।
मिजोरम में हजारों लोगों की रैली
विधेयक के विरोध में मिजोरम की राजधानी आइजोल में हजारों लोगों ने रैली निकाली। यह प्रदर्शन काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम (CCM) के आह्वान पर आयोजित किया गया था। CCM राज्य के नौ प्रमुख चर्च संगठनों का समूह है, जिसमें प्रेस्बिटेरियन चर्च ऑफ इंडिया और बैपटिस्ट चर्च ऑफ मिजोरम भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने विधेयक के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की।
नागालैंड के मुख्यमंत्री ने अमित शाह को लिखा पत्र
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर FCRA में प्रस्तावित संशोधनों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से चर्चों और ईसाई धर्मार्थ संस्थाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।
रियो ने सुझाव दिया कि विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए संसदीय समिति को भेजा जाए ताकि संबंधित हितधारकों को अपने विचार और सुझाव रखने का अवसर मिल सके।
नियमों में बदलाव के बाद बढ़ी चिंताएं
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जून 2026 में FCRA नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत विदेशी धन प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को अपने कार्यक्षेत्र और उद्देश्यों की स्पष्ट श्रेणी चुनना अनिवार्य किया गया था। हालांकि नियमों में धार्मिक आस्था से जुड़ी कई गतिविधियों को अनुमति दी गई है, लेकिन FCRA पंजीकरण की कुछ श्रेणियों में धर्म-प्रचार संबंधी गतिविधियों को शामिल नहीं किया गया है।
फिलहाल टला विधेयक पारित कराने का प्रयास
FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। मानसून सत्र के दौरान इस पर चर्चा और पारित होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन संसद में लगातार हंगामे और विपक्ष के विरोध के कारण विधायी कार्य प्रभावित रहे। अब सरकार द्वारा विधेयक को JPC के पास भेजने के फैसले को व्यापक सहमति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
