‘नए वोटर्स को नहीं देनी होगी मां-बाप की डिटेल’, SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष सुधार (SIR) अभियान से जुड़े कई पुराने फैसलों की समीक्षा की है और जनता को बड़ी राहत देते हुए नियमों को आसान बनाया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी के बीच हुई बैठक में कुछ अहम फैसले लिए गए हैं. ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब एसआईआर को लेकर बवाल हो रहा है.
इस फैसलों से लोगों को बहुत फायदा होने वाला है. इस बैठक में फॉर्म 6 के आसान होने से लेकर पर्सनल सुनवाई की जरुरत तक को खत्म कर दिया है.
क्या हैं ये फैसले
इन फैसलों से आम लोगों को बहुत राहत मिलने वाली है. मतदाता सूची के फॉर्म में गलतियां या गड़बड़ियां होने पर अब लोगों को अधिकारियों के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होना पड़ेगा. इसके साथ ही जिन राज्यों में सुधार का काम पूरा हो चुका है, वहां नए वोटरों के लिए ‘फॉर्म 6’ से वो शर्त हटा दी गई है, जिसमें पिछली मतदाता सूची के अनुसार अपने माता-पिता की जानकारी देना अनिवार्य था.
आंध्र प्रदेश और मेघालय में अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीखों को आगे बढ़ा दिया गया है. आंध्र प्रदेश में अब अंतिम सूची 16 अक्टूबर और मेघालय में 26 अक्टूबर को आएगी.
यह फैसला तब आया है जब मतदाता सुधार प्रक्रिया, नए फॉर्म और सॉफ्टवेयर के काम करने के तरीके को लेकर उठ रहे सवालों के बाद आयोग ने अपने नियमों को और पारदर्शी व सरल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है.
बता दें एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर इस समय बवाल हुआ है. द इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपी खबर के बाद से विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधा हुआ है. हर जगह उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है. इसी बीच कुछ लोग ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग कर रहे हैं.
