‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का सुनवाई से इनकार, याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कथित ‘राष्ट्रविरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने के आरोपों के आधार पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक संगठन की जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। क्षेत्राधिकार (ज्यूरिस्डिक्शन) को लेकर अदालत की आपत्ति के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने इस मामले में दाखिल जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को सक्षम न्यायालय में नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान की।
संगठन पर लगाए गए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि अमेरिका में रह रहे पुणे निवासी अभिजीत दीपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) नामक एक गैर-पंजीकृत संगठन की स्थापना की है। याचिका में दावा किया गया कि यह संगठन विदेशी फंडिंग के जरिए कथित रूप से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त है।
याचिकाकर्ता ने मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को निर्देश देने की मांग की थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया मंचों पर संचालित कई अकाउंट्स का उपयोग युवाओं को प्रभावित करने और भड़काने के लिए किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को ऐसे खातों को तत्काल ब्लॉक करने या बंद कराने का निर्देश देने की मांग भी की थी।
अदालत ने उठाया क्षेत्राधिकार का सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने स्वयं को बेंगलुरु का स्थायी निवासी बताया है। अदालत ने टिप्पणी की कि मामला राष्ट्रीय स्तर का है और याचिकाकर्ता को सबसे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए था।
पीठ ने यह भी कहा कि याचिका में ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं दर्शाया गया है जिससे यह साबित हो कि विवाद का कोई प्रत्यक्ष संबंध उत्तर प्रदेश या लखनऊ पीठ के अधिकार क्षेत्र से है।
अदालत ने यह भी रिकॉर्ड पर लिया कि याचिकाकर्ता पूर्व में भी न्यायालय के समक्ष स्वयं को बेंगलुरु निवासी बता चुका है और उसी आधार पर कुछ राहतें मांग चुका है।
सक्षम न्यायालय में जाने की मिली छूट
जब अदालत ने संकेत दिया कि यह याचिका लखनऊ पीठ के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है, तब याचिकाकर्ता ने इसे वापस लेने और उपयुक्त न्यायालय में दोबारा याचिका दायर करने की अनुमति मांगी।
अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया और याचिकाकर्ता को सक्षम न्यायालय में नए सिरे से याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी। फिलहाल मामले के आरोपों पर कोई टिप्पणी किए बिना हाईकोर्ट ने केवल क्षेत्राधिकार के आधार पर सुनवाई से इनकार किया है।
