रूस से तेल खरीद और विदेश नीति पर इमरान मसूद का हमला, बयान को लेकर छिड़ी नई बहस
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एक बार फिर अपने बयानों से राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। सहारनपुर से सांसद मसूद ने केंद्र सरकार की विदेश नीति, ऊर्जा खरीद और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कई तीखी टिप्पणियां कीं।
विदेश नीति और तेल खरीद को लेकर उठाए सवाल
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की विदेश नीति देश के हितों की अपेक्षा अंतरराष्ट्रीय दबावों से प्रभावित होती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति और रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर अमेरिका का प्रभाव बढ़ता नजर आ रहा है।
रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिकी रुख पर टिप्पणी करते हुए मसूद ने एक विवादित बयान दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत को तेल खरीदने के लिए “परमिशन” का इंतजार करना पड़ रहा है। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
हालांकि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए तेल खरीद के फैसले लेता है तथा किसी बाहरी दबाव में काम नहीं करता।
ईरान को लेकर भी सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद ने ईरान से जुड़े मुद्दे पर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से भारत का मित्र देश रहा है और विभिन्न अवसरों पर उसने भारत का सहयोग किया है। मसूद का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भारत सरकार का रुख अपेक्षित स्तर पर मुखर नहीं रहा, जिससे दोनों देशों के संबंधों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
गौवंश और बीफ निर्यात पर उठाए प्रश्न
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गौवंश संबंधी बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए इमरान मसूद ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि गाय को विशेष सम्मान दिया जाता है, तो उससे जुड़ी नीतियों में भी स्पष्टता और एकरूपता दिखाई देनी चाहिए।
मसूद ने बीफ निर्यात और पशु वध से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार से स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की। उनका कहना था कि इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय ठोस और समान रूप से लागू होने वाले नियम बनाए जाने चाहिए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना
इमरान मसूद के बयानों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है। उनके वक्तव्यों को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच नई बहस छिड़ सकती है, खासकर विदेश नीति, रूस से तेल आयात और ईरान के साथ भारत के संबंधों जैसे मुद्दों पर।
फिलहाल उनके बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं, जबकि केंद्र सरकार लगातार यह दोहराती रही है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर ही विदेश और ऊर्जा नीति से जुड़े फैसले करता है।
