गुरु की माने बिन गुरु को मानना व्यर्थ: पद्मश्री स्वामी भारत भूषण
सहारनपुर। दशविधि स्नान, मार्जन कोपीन लंगोटी, घुटनों से ऊपर तक ब्रह्मचर्य प्राप्त विद्यार्थी की छोटी धोती, कंधे पर झोली, मुख पर तपने की जिज्ञासा का तेज, पास खड़े माता पिता के आशीर्वाद की शक्ति, हर ब्रह्मचारी के हाथ में विश्वविख्यात योगगुरु स्वामी भारत भूषण के सान्निध्य के अनुशासन का दंड धारण किए हुए षोडशोपचार पूर्वक नए साधकों को अपने बीच देख कर हर कोई हाथ जोड़े हर्ष ध्वनि करते हुए मंत्रमुग्ध था।
यहां बेरी बाग मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योगाश्रम में कर्मकांड प्रकोष्ठ के विधिज्ञ पंडित सुनील शर्मा के नेतृत्व में अभिभावकों और व्यवस्थापकों का उत्साह जल्दी चंदन और फूलों की सुगंध के बीच देखते ही बनता था। गुरुपूर्णिमा पर्व पर शिष्यों से संवाद करते हुए योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने दोहराया कि व्यासपूर्णिमा गुरु से बंधने का नहीं साधना से जुड़ने का पर्व है, गुरु बाँधते नहीं मुक्त करते हैं। गुरु द्रोणाचार्य को मानने वाले पांडव और कौरवों को गुरु की मानने वाले भील एकलव्य ने बहुत पीछे छोड़ दिया इसलिए गुरु को मानने तक ही न ठहर जाएं, गुरु की माने बिना गुरु को मानने का कोई अर्थ नहीं है, गुरु को ऐसे दान नहीं दक्षिणा चाहिए जिसका आधार विद्या में दक्षता का धन है, ऐसे उपदेश देते हुए गुरुदेव ने मननपूर्वक जीने की आदत डालने का आवाहन किया।
आज यज्ञोपवीत धारण कर पितृ ऋण, ऋषि ऋण और देव ऋण के प्रति अपने कर्त्तव्यपालन के लिए ब्रह्मचर्यपूर्वक योगशक्ति साधना की साधना लेने वाले रमन शर्मा, मनन शर्मा, अंकुर भाटिया का पुत्र, यश राणा, अनीश (पुत्र मयंक गुंबर), तेजस मखीजा, हर्ष, वंश वर्मा, मृदुल, केशव वर्मा, मोक्ष पपनेजा, अभिनव नैन के साथ संस्थान की नेशन बिल्डर्स अकादमी इंग्लिश मीडियम के बारह से पंद्रह वर्ष आयु के सैकड़ों बच्चों ने स्वयं को गुरुदेव के सान्निध्य में संस्कारित किया। इस अवसर पर वरिष्ठ साधकों में सुभाष चैधरी, पंकज गुप्ता, अमरनाथ, सुभाष वर्मा, राजीव अरोरा, राजीव आनंद, ऋषिपाल सिंह, अंकुर भाटिया, सतीश आर्य आदि की सपत्नीक मौजूदगी में यज्ञोपवीत संस्कार दीक्षा के साथ ही बड़ी तादाद में पुराने साधकों के संस्कार का नवीनीकरण और यज्ञपूर्वक गुरुपूजन संकल्प संकीर्तन के साथ ब्रह्मचारियों द्वारा सामूहिक भोजन प्रसाद के साथ ही भंडारे का आयोजन भी किया गया।
