देवबंद से त्यागी ब्राह्मण समाज ने दिखाई सियासी ताकत; मांगे राम त्यागी ने दी आर-पार की चेतावनी
नितिन नवीन के पश्चिमी यूपी दौरे के एक महीने के भीतर महाकुंभ में उमड़ा जनसैलाब, राजनीतिक हिस्सेदारी और सम्मान को लेकर बुलंद हुई आवाज; हजारों लोगों के पहुंचने से घंटों जाम रहा देवबंद
देवबंद (सहारनपुर)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार को देवबंद से एक ऐसा संदेश निकला, जिसने आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक दलों, खासकर भाजपा के लिए नई चर्चा छेड़ दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश दौरे को अभी एक महीना भी नहीं बीता कि मां त्रिपुर बाला सुंदरी की पावन धरा पर आयोजित त्यागी ब्राह्मण महाकुंभ में समाज ने अपनी एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों और मंच से उठी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग ने इस सामाजिक आयोजन को सियासी रंग दे दिया।
महाकुंभ में त्यागी भूमिहार ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगे राम त्यागी ने भाजपा पर समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। उनके इस बयान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। आयोजन में उमड़ी भीड़ को समाज की बढ़ती राजनीतिक अपेक्षाओं और एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
मांगे राम त्यागी की भाजपा को चेतावनी, अब बर्दाश्त नहीं होगी उपेक्षा
महाकुंभ को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगे राम त्यागी ने समाज के सम्मान और राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने भाजपा पर त्यागी ब्राह्मण समाज को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देने और लगातार उपेक्षा करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि समाज का जिस तरह तिरस्कार किया जा रहा है, उसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि समाज को उसका उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सम्मान नहीं मिला तो इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
मांगे राम त्यागी के इस बयान को केवल सामाजिक नाराजगी नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए एक स्पष्ट संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उन्होंने समाज से अपने अधिकारों और सम्मान के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।

पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा बोले—न कभी झुका है और न झुकेगा समाज
महाकुंभ में पहुंचे पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने त्यागी ब्राह्मण समाज की एकजुटता और राष्ट्रहित में उसके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि त्यागी ब्राह्मण समाज हमेशा राष्ट्रवादी रहा है और देशहित में अपनी भूमिका निभाता आया है।
उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों और साजिशों के बावजूद यह समाज न कभी झुका है और न भविष्य में झुकेगा। उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट होकर अपनी सामूहिक शक्ति का परिचय देने की अपील की।
राजनीतिक हिस्सेदारी और सम्मान पर एक सुर में बोले वक्ता
महाकुंभ में जिलाध्यक्ष सुशील त्यागी, वरिष्ठ समाजसेवी जुगनू त्यागी, मनीष त्यागी और प्रदेश अध्यक्ष सुधीर त्यागी समेत अन्य वक्ताओं ने समाज की एकता, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी पर जोर दिया।
वक्ताओं का कहना था कि समाज को अपनी ताकत पहचाननी होगी और अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठानी होगी। प्रदेश अध्यक्ष सुधीर त्यागी ने कहा कि ब्राह्मण समाज एक है और हमेशा एक रहेगा। उन्होंने आपसी एकजुटता को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और गाड़ियों से पहुंचे हजारों लोग, घंटों जाम रहा देवबंद
त्यागी ब्राह्मण महाकुंभ में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, कारों और अन्य वाहनों से देवबंद पहुंचे। आयोजन में उमड़ी भीड़ के चलते नगर की यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई।
कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लोगों को घंटों जाम से जूझना पड़ा। कार्यक्रम में लोगों की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को सामाजिक शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया।
नितिन नवीन के दौरे के बाद देवबंद से उठी आवाज के क्या हैं सियासी मायने?
इस महाकुंभ का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश दौरे के कुछ ही सप्ताह बाद त्यागी ब्राह्मण समाज ने बड़े मंच से अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी और सम्मान का मुद्दा उठाया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों की अहम भूमिका रही है। ऐसे में महाकुंभ के मंच से भाजपा की कथित उपेक्षा को लेकर उठी आवाज को आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, इस आयोजन में उमड़ी भीड़ को सीधे किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से जोड़ना जल्दबाजी होगी, लेकिन समाज के प्रमुख पदाधिकारियों की ओर से राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर दिखाई गई नाराजगी भाजपा के लिए विचारणीय जरूर हो सकती है।
2027 से पहले भाजपा के सामने नया सियासी सवाल
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे समय में देवबंद में आयोजित त्यागी ब्राह्मण महाकुंभ ने राजनीतिक दलों के सामने समाज की हिस्सेदारी और सम्मान से जुड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
महाकुंभ के मंच से निकला संदेश साफ था कि समाज अब केवल आश्वासनों के बजाय राजनीतिक भागीदारी और सम्मान के मुद्दे पर ठोस पहल चाहता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस नाराजगी को किस तरह लेती है और समाज की ओर से उठाई गई मांगों पर उसका अगला कदम क्या होता है। फिलहाल देवबंद का यह महाकुंभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा का केंद्र बन गया है।
