ध्यानु भक्त उपवन की भूमि के मालिकाना हक पर विवाद, पंडित देवी शरण शर्मा ने किया दावा

ध्यानु भक्त उपवन की भूमि के मालिकाना हक पर विवाद, पंडित देवी शरण शर्मा ने किया दावा
देवबंद में ध्यानु भक्त उपवन की भूमि के मालिकाना हक को लेकर पत्रकारों से वार्ता करते पंडित देवी शरण शर्मा।

राजस्व अभिलेखों में मंदिरों के नाम भूमि दर्ज नहीं होने की कही बात, आठ बीघा बाग में चार बीघा जमीन पर जताया अपना अधिकार

देवबंद। श्री त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर के निकट स्थित ध्यानु भक्त के उपवन और समाधि स्थल की भूमि को बेचने के प्रयास को लेकर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय जनजागृति सेना की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच पंडित देवी शरण शर्मा ने पत्रकार वार्ता कर संबंधित भूमि पर अपना मालिकाना हक जताया। उन्होंने दावा किया कि राजस्व अभिलेखों में संबंधित मंदिरों के नाम कोई भूमि दर्ज नहीं है और जमीन के खेवटदार ही इसके मालिक हैं।

शनिवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए पंडित देवी शरण शर्मा ने बताया कि खेवट संख्या 516 में कुल 84 बीघा भूमि दर्ज है। इसमें आठ बीघा में बाग है, जबकि देवीकुंड कुल 17 बीघा भूमि में स्थित है। उनके अनुसार, राजस्व अभिलेखों में ध्यानु भक्त मंदिर, मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों के नाम कोई संपत्ति दर्ज नहीं है।

पांच परिवारों के 27 लोग हैं हिस्सेदार

पंडित देवी शरण शर्मा ने बताया कि संबंधित खेवट में पांच परिवारों के कुल 27 लोग हिस्सेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि इसमें 50 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले उनकी है। बाग की भूमि बेचने के प्रयास को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके नाम दर्ज भूमि को बेचने का उन्हें अधिकार है।

उन्होंने बताया कि आठ बीघा के बाग में उनकी चार बीघा भूमि है, जिसे वह बेच सकते हैं। इस तरह उन्होंने भूमि पर अपने अधिकार का पक्ष रखते हुए राजस्व अभिलेखों का हवाला दिया।

ध्यानु भक्त के उपवन और समाधि स्थल की भूमि को लेकर उठे विवाद के बीच अब संबंधित भूमि के मालिकाना हक और राजस्व अभिलेखों की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, पत्रकार वार्ता में पंडित देवी शरण शर्मा की ओर से किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा दूसरे पक्ष का बयान सामने आना बाकी है।

पत्रकार वार्ता के दौरान पंडित लोकेश शर्मा, चौधरी जसबीर और राम कुमार भटनागर मौजूद रहे।

Leave a Reply