उपनिबंधन कार्यालय बना जी का जंजाल, दस्तावेजो की रजिस्टरी कराने मे लग रहे है कई कई दिन, किसानो मे रोष
नकुड 18 जून इंद्रेश। तहसील मुख्यालय पर स्थित रजिस्टरी कार्यालय मे बैनामे जिस्टरी कराना बेहद मुश्किल हो गया है। एक बैनामा कराने मे दो से तीन दिन लग रहे है। निबंधन विभाग की साईट गति कम होने से लोग परेशान है। जिससे किसानो मे निबंधन विभाग के प्रति रोष है।
तहसील परिसर मे रजिस्टरी कार्यालय मे बैनामे कराने वालो की भारी भीड है। एक बैनामा रजिस्टर कराने मे ही कई कई दिन लग रहे है। बुद्धवार को शाम 117 बैनामों के दस्तावेज अनुबंधन के लिये रजिस्टरी कार्यालय मे रखे हुए थे। गुरूवार को दुपहर तीन बजे तक इनमे से मात्र 56 दस्तावेजो का पंजिकरण हो पाया। जबकि गंुरूवार को कार्यालय मे आये दस्तावेज अगले दिन की इंतजार मे इकटठा होते रहे। रजिस्टरी मे कर्मचारी साईट की गति कम होने की बात कहकर नाराज खरीददारो वे विक्रेताओं समझाने का प्रयास करते देखे गये।
गौरतलब है कि भूमि के क्रय विक्रय मे सरकार पंाच फिसदी स्टांप व एक फिसदी रजिस्टरी शुल्क वसूलती है। जबकि कार्यालय मे सुविधाओ के नाम पर शून्य है। कार्यालय मे क्रेताओ व विक्रेताओं को एक बैनाम रजिस्टरी करने के लिये कई कई दिन पापड बेलने पड रहे हैं। कार्यालय मे न बैठने की जगह है न पीने के लिये पानी। मजेदार बात यह हैं दस्तावेज को रजिस्टरड कराने से पहले दस्तावेज का ओन लाईन रजिस्टरी कराना होता है। जिसमे क्रेता विक्रेता को डेढ से दो सौ रूपये खर्च करने होते हैं । यदि साईट न चलने पर उस दिन बैनामे का पंिजकरण नंही होता तो दस्तावेज को अगले दिन रजिस्टरड कराने के लिये फिर से ओन लाईन रजिस्टरेशन कराना होगा। जिसकी दुबारा से फीस देने पडती है।
बार ऐसोसिएशन के महासचिव अरविंद राठी ने कहा कि रजिस्टरी कार्यालय का बूरा हाल है। कोई सुनने वाला नंही है। वकीलो का कहना है कि यदि साईट को ठीक से चले तो सेम डे ही बैनामे रजिस्टरड हो जाते है। पंरतु साईट न चलने की समस्या हमेशा से ही बनी हुई हैं । भाकियु के मंडल अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि यदि साईट ठीक नंही चल रही है तो रजिस्टरेशन का समय बढाना चाहिए। दस्तावेज रजिस्टरेशन का समय सुबह नो बजे से शाम सात या आठ बजे तक किया जाना चाहिए। ताकि उसी दिन दस्तावेज का पंजिकरण हो जाये। गौरतलब है कि बहुत से क्रेता तो हरियाणा,पंजाब व दिल्ली जैसे राज्यो से आते है। पंरतु साईट न चलने से उन्हे अगले दिन फिर नकुड आना पडता है। निबंधन विभाग के मनमानी व लापरवाही से किसानो मे बेहद रोष है।
