दो साल के बच्चे की बलि देने वाले तांत्रिक दंपती की फांसी को सुप्रीम कोर्ट सही ठहराया

 

धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर दो साल के बच्चे की हत्या करने वाले तांत्रिक दंपती की फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन, जस्टिस एस सुभाष रेड्डी और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने छत्तीसगढ़ निवासी ईश्वरी लाल यादव और उसकी पत्नी किरण बाई द्वारा दो वर्ष के बच्चे की हत्या के मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ बताते हुए फांसी की सजा सुनाई है।

पीठ ने पाया कि इस दंपती को पहले भी छह साल की बच्ची की हत्या में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई थी, हालांकि हाईकोर्ट ने सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया था। पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दोनों में मानवता नाम की चीज नहीं है और इनके सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं है।

मामले के मुताबिक, 23 नवंबर को दो वर्षीय बच्चा दुर्ग स्थित अपने घर से गायब हो गया था। उसके माता-पिता सहित अन्य परिजन बच्चे की तलाश में इधर-उधर भटक रहे थे। इतने में लोगों ने ईश्वरी लाल यादव के घर से तेज आवाज में म्यूजिक बजते सुना। जब परिजन उसके घर में दाखिल हुए तो उन्हें जमीन के एक हिस्से में मिट्टी उठी हुई दिखाई दी।

परिजनों को शक हुआ। जब भीड़ ने पूछा है कि इसके अंदर क्या है तो यादव ने बताया कि उसने बच्चे की बलि चढ़ा दी है। जिसके बाद मिट्टी हटाई गई और वहां बच्चे का शव मिला। छानबीन के दौरान तांत्रिक दंपती ने बताया कि छह-सात महीने पहले उसने एक और बच्चे की हत्या की थी।

 
 

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