फर्जी वकीलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, देशभर में डिजिटल वकील रजिस्ट्री बनाने की मांग पर मांगा जवाब

फर्जी वकीलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, देशभर में डिजिटल वकील रजिस्ट्री बनाने की मांग पर मांगा जवाब

नई दिल्ली। देश में वकालत के पेशे में कथित तौर पर फर्जी लोगों की बढ़ती घुसपैठ को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) की ओर से दावा किया गया है कि देश में हर तीन में से एक वकील फर्जी हो सकता है। इस गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय स्तर पर वकीलों के लिए आधार की तर्ज पर डिजिटल रजिस्ट्री बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि देश के सभी पंजीकृत वकीलों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्टर तैयार किया जाए, जिसमें प्रत्येक अधिवक्ता को एक यूनिक राष्ट्रीय पहचान संख्या दी जाए। इसका उद्देश्य फर्जी वकालत करने वालों पर रोक लगाना और कानूनी पेशे में पारदर्शिता बढ़ाना है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह प्रस्ताव एक नवोन्मेषी विचार प्रतीत होता है और तकनीक की मदद से इसे लागू किया जा सकता है।

बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा दायर याचिका में यह भी मांग की गई है कि BCI को अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 49 के तहत डिजिटल और इंटरनेट मीडिया से जुड़ी आचार संहिता तैयार करने के निर्देश दिए जाएं।

BAI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विपिन नायर और प्रशांत कुमार ने अदालत में पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जुलाई में तय की है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि कानून विश्वविद्यालयों को भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए। BAI के वकील ने बताया कि UGC को पहले ही याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल किया जा चुका है।

Leave a Reply