‘मुस्लिम CM चेहरा घोषित करे सपा, अब दरी नहीं बिछाएंगे’, AIMIM ने अखिलेश यादव को दी चुनौती

‘मुस्लिम CM चेहरा घोषित करे सपा, अब दरी नहीं बिछाएंगे’, AIMIM ने अखिलेश यादव को दी चुनौती

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले मुस्लिम वोटरों को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की चुनौतियां बढ़ती दिख रही है. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने जहां सपा से आगामी चुनाव में मुस्लिम को सीएम बनाने का ऐलाने करने की मांग की है. वहीं अब असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने मुस्लिम सीएम की माँग का समर्थन किया और कहा कि अब हम दरी नहीं बिछाएंगे.

एआईएमआईएम के प्रवक्ता शादाब चौहान ने कहा कि मुसलमानों ने 34 सालों तक समाजवादी पार्टी को वोट दिया और चार बार मुख्यमंत्री बनाया है लेकिन अब ये सब नहीं चलेगा. उन्होंने सपा के पीडीए पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सिर्फ मुस्लिम वोट की डकैती का षडयंत्र है. अगर सपा मुखिया ईमानदार है तो मुस्लिम को सीएम का चेहरा घोषित करें.

मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करे सपा

शादाब चौहान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा- “समाजवादी पार्टी को मुसलमानों ने 34 साल वोट दिया, नोट दिया, सपोर्ट किया और लाठी डंडे खाए और दूध बेचने वाले यादव जी के बेटे को 4 बार मुख्यमंत्री बनाया. अगर अखिलेश यादव जी वाकई ईमानदार और वफादार हैं तो 2027 चुनाव के लिए मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करें, चाहे 2 साल मुसलामान, 2 साल दलित व 1 साल अति पिछड़ा की घोषणा करें. नहीं तो PDA सिर्फ एक षडयंत्र है मुस्लिम वोटबैंक पर सियासी डकैती का.”

AIMIM नेता ने कहा -“उत्तर प्रदेश का मुसलमान संविधान रक्षक ओवैसी साहब को अपना नेता मान चुका है, वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा. अब दरी नहीं बिछाएंगे भागीदार बनेंगे, क्योंकि उत्तर प्रदेश का मुसलमान समाजवादी पार्टी का सियासी गुलाम नहीं है और अल्लाह से डरने वाले समाज को अखिलेश जी BJP से नहीं डरा सकते. हम समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों का मुकाबला करने तैयार हैं.”

यूपी चुनाव से पहले बढ़ी सपा की मुश्किल

बता दें कि इससे पहले यूपी में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने भी अखिलेश यादव को चिट्ठी लिखकर मुस्लिम को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यूपी में 22 फीसद मुस्लिम हैं और यादव सिर्फ 7 फीसदी है. इसलिए सीएम पद पर उनका दावा मजबूत हैं. सपा मुखिया पर मुसलमानों का बहुत एहसान हैं. अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो 2027 में मुस्लिम उन्हें समर्थन नहीं देंगे.

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